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मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती का 94 साल की उम्र में आज सुबह करीब 8:30  बजे दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली. सोबति पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं और एक हफ्ते से अस्पताल में भर्ती थीं. उनका पार्थिव शरीर उनके मयूर विहार स्थित घर पर लाया गया है.बताया जा रहा है कि कृष्णा

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कृष्णा सोबती महिलाओं के मुद्दों पर जमकर कलम चला चुकी हैं. साल 1966 में प्रकाशित ‘मित्रो मरजानी’ उनका सबसे मशहूर उपन्यास है. इस उपन्यास के जरिए उन्होंने महिलाओं की आजादी के सवाल को समाज के बीच काफी मुखरता से उठाया था. इसके अलावा ‘डार से बिछड़ी’, ‘दिलो-दानिश’, ‘ऐ लड़की’ और ‘समय सरगम’ जैसे कई उपन्यास लिखे.

कृष्णा सोबती को उनके उपन्यास ‘जिंदगीनामा’ के लिए साल 1980 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. उन्हें 1996 में अकादमी के उच्चतम सम्मान ‘साहित्य अकादमी फैलोशिप’ से नवाजा गया था. इसके अलावा कृष्णा सोबती को पद्मभूषण, व्यास सम्मान, शलाका सम्मान से भी नवाजा जा चुका है.