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किया तबाह तो दिल्ली ने भी बहुत ‘बिस्मिल’,
मगर ख़ुदा की कसम लखनऊ ने लूट लिया।
~बिस्मिल सईदी

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कशिश-ए-लखनऊ अरे तौबा,

फ़िर वही हम वही अमीनाबाद।

~य़ग़ाना चँगेज़ी

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ज़बान-ए-हाल से ये लखनऊ की खाक कहती है,

मिटाया गर्दिश-ए-अफ़्लाक ने जाह-ओ-हशम हमारा।

~ब्रजनारायन चकबस्त

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अर्ज़-ए-दक्कन में जान तो दिल्ली में दिल बना,

और शहर-ए-लखनऊ में हिना बन गई ग़ज़ल।

~गणेश बिहारी ताज़

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लखनऊ, शराब, शायरी, जुनूँ,

रिश्ते सौ तरह के निकलते हैं।

~सलमान अख़्तर

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