ना जाने बाहर भी कितने आसेब मुंतज़िर हों;
अभी मैं अंदर के आदमी से डरा हुआ हूं।
~आनिस मुईन

एक आसेब तआक़्क़ुब में लगा रहता है;
मैं जो रूकता हूं फिर उसकी सदा चलती है।
~लियाक़त जाफ़री

रात अजब आसेब-ज़दा सा मौसम था;
अपना होना और ना होना मुबहम था।
~ज़हरा निगाह

शहर में जैसे कोई आसेब है;
शहर में मुद्दत से हंगामा नहीं।
~रसा चुग़ताई

घर में आसेब ज़लज़ले का है;
इसलिए ख़ुद में ही सिमट के हैं।
~शमीम क़ासमी