केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को भूपेन हजारिका पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और समाजसेवी नानाजी देशमुख को इस साल का भारत रत्न अवार्ड देने की घोषणा की थी।लेकिन खबरों के मुताबिक भूपेन हजारी के बेटे तेज हजरिका ने पिता को दिए गए भारत रतन को लेने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह भारत रतन तभी लेंगे जब केंद्र सरकार नागरिकता विधेयक को वापस लेगी।जानकारी के मुताबिक इस मुद्दे पर हजारिका परिवार दो दलों में बट गया है।

कुछ का मानना है कि भारत रत्न का अपमान नहीं करना चाहिए तो साथ ही छोटे भाई जयंती की पत्नी गायिका मनीषा हजारे ने कहाना है कि भूपेंद्र किसी एक व्यक्ति या परिवार के नहीं थे पूरे देश के लिए भूपेन दा है।उनके लिए घोषित अवॉर्ड लेने या नहीं लेने का फैसला कोई और व्यक्ति नहीं करेगा।नानाजी देशमुख इससे पहले भी पद विभूषण से लेकर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और नेशनल अवार्ड आदि सम्मान मिले हैं। 2009 में उन्हें असम रतन और उसी साल संगीत नाटक एकेडमी अवार्ड से सम्मानित किया गया। व्यक्ति के जीवन में वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी माने जाते हैं। असम के नीति सुखिया जिले के सदिया कस्बे में जन्मे हजार एक प्रतिभावन गीतकार संगीतकार और गायक थे।

उनके संगीत में असमिया बंगाल और हिंदी की मिठास महसूस की जाती थी। भूपेन हजारी के बेटे अमेरिका में रहते हैं। उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए स्थिति जाहिर की कि नागरिक विधेयक के कारण राज्य में पैदा हुए मौजूदा स्थिति में यह अवार्ड लेना सही नहीं है। तेज हजारीका का कहना है यदि मेरे पिता जीवित होते तो वह मौजूदा हालात में भारत रतन नहीं लेते। उनका बेटा होने के नाते मैं भी असम के लोगों के लिए कम से कम इतना तो कर ही सकता हूं।