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सुनेगा कौन मिरी चाक-दामानी का अफ़साना,
य़हाँ सब अपने पैरहन की बात करते हैं।

~कलीम आजिज़

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माना कि रगं-रगं तिरा पैराहन भी है,
पर इसमें कुछ करिश्मा-ए-अक्स-ए-बदन भी है।

~जाँनिसार अख़्तर

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मिरे जुनूँ ने ज़माने को ख़ूब पहचाना,
वो पैराहन मुझे बख़्शा कि पारा-पारा नहीं।

~अल्लामा इक़बाल

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जामा-ए-सुर्ख़ देख के तेरा गुल,
पैराहन अपना क़बा करते हैं।

~गोया फ़क़ीर मोहम्मद

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एक चाक-ए-बरहनगी है वजूद,
पैरहन हो तो बे-रफ़ू ठहरे।

~जौन एलिया

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