अंगड़ाई ये किसने ली अदा से;
कैसी ये किरन फ़ज़ा में फूटी।
-जाँ निसार अख़्तर

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अंगड़ाई भी वो लेने न पाए उठा के हाथ;
देखा जो मुझ को छोड़ दिए मुस्कुरा के हाथ।
~निज़ाम रामपुरी

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चाँद अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेता है जोबन के बीच,
मद्धम मद्धम दीप जले हैं सोए सोए नयन के बीच।
~अहसन अहमद अश्क़
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जिस्म की चाह लकीरों से अदा करता है;
ख़ाक समझेगा मुसव्विर तेरी अंगड़ाई को।
~वसीम बरेलवी
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अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है;
जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की।
~परवीन शाकिर