बाराबंकी/लखनऊ, 23 फरवरी (आरएनआई)। जुरौंडा गांव में 115 शौचालय बनाने के लिए पैसा दिया गया था। जिसमे से 78 शौचालय ही बन सके है। वहीं लगभग तीन हजार आबादी एवं 150 घर वाले जुरौंडा गांव के किसी परिवार के पास अपना शौचालय नहीं है। यहां के परिवार आज भी खुले में शौच करने को विवश हैं। इसके बावजूद भी गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। गांव की निवासिनी सोनापति बताती है कि शौचालय न होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को झेलनी पड़ती है। शौचालय के लिए कई बार आवेदन मांगे गए। मगर अभी तक शौचालय नहीं बन पाया है। यहां के निवासी बताते हैं कि वे अपना शौचालय बनवाना चाहते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने से नहीं बन पाया। शौचालय के लिए सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही है। एक अन्य ग्रामीण प्रेम सिंह के अनुसार शौचालय के लिए नाम मात्र का गड्ढा खोदकर निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। नरेश बताते है कि शौचालय के लिए कई बार ग्रामीणों से फोटो खिचवाई। बावजूद इसके न ही शौचालय बन पाया और न ही अनुदान राशि मिल पाई। रणजंय सिंह, कमलेश, शिवनाथ, रामपाल, रामनिवास, कल्लू आदि दर्जनों लोगों ने गांव में एक भी शौचालय न बनाए जाने की बात कही। विकास खंड त्रिवेदीगंज के टिकरा गांव में डेढ़ सौ शौचालय बनाने थे। गांव में सुकई रावत, श्यामलाल मिश्र, राम प्रताप, कतऊ मिश्र जगदंबा प्रसाद सहित एक दर्जन ग्रामीणों ने बताया कि खुद मेहनत करके शौचालय बनवाया है। ठेकेदार ने मानक विहीन शौचालय बनवाया है। टिकरा गांव के निवासियो ने बताया कि हमारे यहां पर ठेकेदार द्वारा शौचालय निर्माण में पीली ईंटों व बहुत कम मात्रा में बालू में सीमेंट मिलाकर प्रयोग किया गया है। सीडीओ मेधा रूपम का कहना है कि मामले की किसी ग्रामीण ने मुझसे शिकायत नहीं किया है। यदि कोई शिकायत आयेगी तो कार्यवाही की जाएगी।