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भारतीय जनता और राजनीति में भ्रष्टाचार हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है. होना भी चाहिए क्योंकि देश की जनता से लूट और देश से गद्दारी बड़ा अपराध है लेकिन यह मुद्दा केवल चुनावी वर्ष या चुनाव से ठीक पहले क्यों गर्माता है?वर्ष 2018 में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, राजद प्रमुख लालू प्रसाद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर जैसे राजनीतिक दिग्गजों के मामले चर्चा में रहे.वहीं, वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में प्रत्यर्पित करा कर लाए गए कथित बिचौलिये क्रिश्चन मिशेल के मामले ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा.
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय, दोनों ने ही कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति के खिलाफ कार्रवाई तेज की तथा एयरसेल-मैक्सिस सौदा मामले में उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया. वहीं, दिल्ली पुलिस ने सुनंदा पुष्कर को आत्महत्या के लिए कथित तौर पर उकसाने को लेकर कांग्रेस नेता एवं उनके पति शशि थरूर को अरोपपत्र में नामजद किया. वहीं हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भी केंद्र सरकार सख्त दिखाई दी.
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा ”नेशनल हेराल्ड मामले में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ दायर मुकदमा भी सुर्खियों में रहा. राजद प्रमुख लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव और बेटी मीसा को आईआरसीटीसी घोटाले में कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ा.
2014 में नारों और वादों की वजह से सबको लगा होगा कि भाजपा सरकार के केंद्र में आते ही भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा.देश में उन्नति और विकास होगा लेकिन न भ्रष्टाचार का खात्मा  हुआ,न ही विकास हुआ और न ही कोई उन्नति देखने को मिली.जो सोचा उसका उलटा ज़रूर हुआ देश में संगीन मामलों की जांच करने वाली संस्था सीबीआई में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया,देश में विकास की बात कही देखने को नही मिली और वही घिसे-पिटे धर्म-जाति के मुद्दों पर राजनीति आज भी फल-फूल रही है.लोगों को तैयार किया जा रहा है कि वह उग्र हों और उनका राजनीतिक लाभ उठाया जा सके.जिसके बल पर लगातार सत्ता का सुख भोगा जा सके.भारत देश के लोगों में डर बैठाया जा रहा है कि अगर हम सत्ता में नही रहे तो देश के अल्पसंख्यक,देश के बहुसंख्यक को मार डालेंगे.यह सोचने की बात है कि अल्पसंख्यक बहुसंख्यक को मार कैसे सकता है? एक और डर है जो देश की जनता में हमेशा बैठाया जाता है वह यह कि पाकिस्तान हिंदुस्तान से मजबूत हो जाएगा.पाकिस्तान को कमज़ोर करने के लिए भाजपा का सत्ता में रहना बहुत ज़रूरी है.यह किस कद्र की घटिया मानसिकता वाली बात है कि जिस देश को भारत हर स्तर पर हरा चुका है वह हमसे मज़बूत कैसे हो सकता है?
खैर अब देश में विकास की बात पर भी गौर करना ज़रूरी है साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि मौजूदा भारत सरकार की विकास के मामले में किस स्तर की समझ है? देश में जीएसटी एक बड़ा बदलाव माना जा रहा था.सत्ता में रहते यूपीए(कांग्रेस) भी इसको लागू  करना चाहती थी लेकिन भाजपा विरोध कर रही थी.अब सत्ता में भाजपा है तो कांग्रेस विरोध कर रही है लेकिन लोकसभा में प्रचंड बहुमत के बल पर भाजपा ने जीएसटी लागू करने का निर्णय कर लिया.अब इसमें इतनी कमियां देखने को मिली कि खुद सरकार इसमें कई बार संशोधन कर चुकी है लेकिन अभी तक  इसके सही होने की उम्मीद दिखाई नही दी है.सरकार की लगातार संशोधन करने से ही समझ आ जाता है कि विकास नीतियों की उसे कितनी समझ है?
खैर 2014 में 60 महीनों के मौका देने के लिए देश से वादा करके सत्ता में आई भाजपा कोई खास कमाल नही दिखा पाई. अब 2019 में लोकसभा चुनाव है और पार्टी फिर से ‘हिंदू मुस्लिम,राम मंदिर और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर वोट चाहती है’.जबकि राफेल में भ्रष्टाचार करने के मामले में स्वयं भाजपा सवालों के घेरे में है,नोटबन्दी भी एक तरह का भ्रष्टाचार ही था,जिससे बड़े-बड़े पूंजीपतियों को लाभ हुआ और देश की जनता को परेशानी हुई.हाल ही में उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के तीन मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे है लेकिन सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के भ्रष्टाचार को याद दिलाकर देश की जनता को गुमराह कर रही है और वापस 2019 में सत्ता के लिए देश में दंगा और जनता को नंगा करने की रणनीति पर काम कर रही है.
(हसन हैदर)