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पिछले दो दशकों से ज़्यादा इंतज़ार के बाद आख़िरकार उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति को यूपी का एक धुरंधर मिल ही गया। ज़मीन के नेता का ज़मीनी संघर्ष यूपी की सड़कों पर दिख रहा है। अजय कुमार लल्लू कांग्रेस पार्टी के लिए यूपी में किसी संजीवनी से कम नहीं जो कांग्रेस की बंजर ज़मीन पर अपने संघर्ष के पसीने की बूंदों से विकास और वर्चस्व, उत्साह और उम्मीद, सफलता और सम्मान के साथ प्रगति और प्रतिष्ठा की फसल उगाने के लिए अभी से मैदान में हैं।

अजय कुमार लल्लू यूपी कांग्रेस के लिए इस लिए भी महत्वपूर्ण हैं कि ज़मीन और जनता से न वह खुद दूर हैं और न ही उन से जनमानस और जनाधार अलग है। पिछले दो बार से लगातार विधायक हैं। मोदी लहर में भी बीजेपी को बड़ी मजबूती से धूल चटाने में सफ़ल अजय कुमार लल्लू जनता के बीच के हैं इसी लिए जनता की आवाज़ हैं।

यूपी समेत देश भर में कांग्रेस पार्टियों में ऐसे नेताओं की भारी कमी देखने को मिल रही है जो जनता का नेतृत्व जनता के पीछे से नहीं बल्कि अगली पंक्ति में खड़ा रह के करे। जनता को अपना प्रतिनिध अपने ही बीच कर चाहिए। क्यूंकि वही उन की मूल समस्याओं को जान सकता है और अंतरात्मा को महसूस कर सकता है।

अजय कुमार लल्लू का संघर्ष नया नहीं है। छात्र राजनीति से ही ज़मीनी मुद्दों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। ख़ुद मज़दूरी कर के मज़दूरों की पीड़ा और उन की तकलीफ़ का अनुभव भी किया। आन्दोलन का नेतृत्व करते वक़्त ख़ुद लाठियां खाई हैं। सादा जीवन उच्च विचार उन का व्यक्तित्व है। अभी तक लोगों से मिलने जुलने में बहुत ज़्यादा प्रोटोकॉल देखने को नहीं मिला है।

अजय कुमार लल्लू को हालाँकि प्रियंका गाँधी वाड्रा का क़रीबी बता कर उनकी की ख़ुद की प्रतिभा को द्वित्तीय श्रेणी में रखने का काम किया जा रहा है। क्यूंकि अगर अजय कुमार लल्लू को उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति का अध्यक्ष बनाये जाने की वजह प्रियंका से नज़दीकी है तो यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं है कि यूपी कांग्रेस की राजनीति में कोई बदलाव आने वाला नहीं है।

कांग्रेस के लिए सब बड़ी चुनौती उस का बिगड़ता संगठन और ज़मीनी मुद्दों से भटका हुआ नेतृत्व है। उस के पास अनुभव और प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन उसे संगठित करने में कम से कम पिछले दो दशकों से ज़्यादा विफ़ल होती दिख रही है। नयी प्रतिभा की तलाश नहीं है।

अन्य अवसर की भारी कमी है। काम से ज़्यादा बयान को महत्वता मिलती है। किसी बड़े नेता से जब तक गहरी नज़दीकी न हो पार्टी में पद और काम मिलना लगभग असंभव होता है। विचारों में असहमति का सम्मान जो कांग्रेस की USP थी आज शायद उस में काफ़ी कमी है।

अजय कुमार लल्लू का पूरा व्यक्तित्व आज की यूपी के मौजूदा हालात के हिसाब से फ़िलहाल बिलकुल ठीक नज़र आ रहा है।

अजय कुमार के लिए जातिगत वर्चस्व, ध्रुवीकरण और नए सिपाहियों की तलाश के साथ उन की एंट्री और उस के बाद उन के लिए आगामी चुनाव के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करने के साथ उन की प्रतिभा का सफल और कुशल प्रयोग बड़ी चुनौती रहेगी। अभी जो आसन दिख रहा है ज़रूरी नहीं कि यह सकारात्मकता निरंतर बनी रहे लेकिन अजय कुमार लल्लू का ज़मीनी जुड़ाव अन्दर और बाहर की लड़ाई में बड़ा मददगार होगा।