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CAA, NRC और NPR को लेकर सरकारी बयानों और नेताओं के भड़काऊ भाषणों द्वारा फैलाये गए भ्रम पर दिल्ली के शाहीन बाग़ समेत देश के कोने कोने में शाहीन बाग़ रुपी शांति पूर्ण प्रदर्शन अब दिल्ली चुनाव में बीजेपी का मुद्दा बनता जा रहा है। दिल्ली में केजरीवाल ने जिस तरह विपक्ष को विकास के मुद्दे पर घेर रखा था, विपक्ष को आख़िरकार शाहीन बाग़ का सहारा लेना पड़ा।

देश भर में हिन्दू मुस्लिम, भारत पाकिस्तान और देश द्रोही देश भक्त के फ़र्ज़ी प्रमाण पत्र और भद्दे राजनैतिक प्रचार से अब तक काम चलाने वाली बीजेपी सरकार दिल्ली में केजरीवाल के झाड़ू में फँस गयी। इस लिए उस ने शाहीन बाग़ के शांति पूर्ण प्रदर्शन को मुद्दा बनाने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं।

शांत स्वभाव और विकास के मुद्दों पर बात करने वाले केजरीवाल भी इस मुद्दे में फंसते नज़र आ रहे हैं। शाहीन बाग़ के साथ या ख़िलाफ़ की बहस में इस वक़्त केजरीवाल को बेबस पा रहे हैं। वैसे जिस तरह से देश में मानसिक साम्प्रदायिकता बढ़ती जा रही है शाहीन बाग़ बीजेपी के लिए रामबाण और लक्ष्मण बूटी साबित हो सकता है।

भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगा चुके बीजेपी ही के वर्तमान उम्मीदवार कपिल मिश्रा ने फिर से भारत के टुकड़े की बात कही और 8 फ़रवरी के दिल्ली के चुनाव भारत पाकिस्तान का मुक़ाबला कह डाला। विपक्ष के दबाव बनाने पर चुनाव आयोग ने मामले को संज्ञान में लेते हुए FIR दर्ज कर ली है लेकिन उन की देश भक्ति पर कोई फर्क नहीं पड़ता। CAA, NRC और NPR के समर्थन में हो रहे धरनों में जब देश के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सीधे “देश के गद्दारों को गोली मारो ..लों को” के नारे लगते हैं तब भी सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता क्यूंकि इन का सम्बन्ध बीजेपी समर्थन से है।

अभी बीजेपी के नेता ने भी गद्दारी का नारा लगा दिया और अभी भी कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन शर्जील इमाम देश द्रोही और आतंकवादी है। पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों पर राजनीति करने के बाद जब देवेन्द्र सिंह पकड़ा जाता है पुलवामा हमले में छाती पीटने वाली गैंग मौन है क्यूंकि अब इस से बीजेपी का कोई फ़ायदा नहीं है बल्कि उस से फँस सकती है।

शाहीन बाग़ के प्रदर्शन से सड़क जाम है, लोगों को आने जाने में दिक्क़त हो रही है, कई दिनों से रास्ता बंद है, आवागमन बाधित है, जैसे मुद्दे सिर्फ़ चुनाव के लिए है। बीजेपी का दावा है कि यह समस्या तब ख़त्म होगी जब दिल्ली में बीजेपी की सरकार होगी। जब कि सच यह है कि दिल्ली में पुलिस व्यवस्था केंद्र के पास है। और शाहीन बाग़ का प्रदर्शन आधे घंटे में ख़त्म हो सकता है बस सरकार का कोई प्रतिनिध जनता के बीच जा कर उन से बात कर ले।
आये दिन जिस तरह से बीजेपी के बकैतों के बोल बिगड़ते जा रहे हैं, डर है कि यह शांत प्रदर्शन को उग्रता में न बदल दें। इसी हिंसा में बीजेपी का चुनाव जिंदा हो सकता है।

शरजील इमाम अगर दोषी है तो उस को सज़ा दो या फिर बीजेपी में शामिल कर के उस के दोष धुल दो। लेकिन एक आम आदमी को उकसाना और भड़काना बंद करो।
केजरीवाल और शाहीन बाग़ के संयम और धैर्य का बड़ा इम्तिहान है।