सुल्तानपुर,  2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस के अभेद दुर्ग अमेठी से सटे हुए सुल्तानपुर लोकसभा सीट से गांधी परिवार के उत्तराधिकारी वरुण गांधी को उतारकर इसे हाई प्रोफाइल तो बनाया. साथ ही साथ भारतीय जनता पार्टी 16 साल के अपने सूखे को भी खत्म कर कमल खिलाने में कामयाब रही।

आदि गंगा गोमती किनारे बसे सुल्तानपुर की सल्तनत पर लंबे समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा है, लेकिन दुर्भाग्य रायबरेली और अमेठी की तरह कभी इसे वीवीआईपी सीट की अहमियत नहीं मिल सकी। इस सीट पर कांग्रेस से लेकर जनता दल, बीजेपी और बसपा जीत का परचम लहराने में कामयाब रही हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी इस सीट पर कभी भी जीत का स्वाद नहीं चख सकी है।

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इस लोकसभा क्षेत्र से गांधी परिवार के वरुण गांधी को उतारकर इसे हाई प्रोफाइल बनाया और कमल खिलाने में कामयाब रही।

राजनैतिक पृष्ठभूमि–

आजादी के बाद से सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर अभी तक 16 लोकसभा चुनाव और 3 उपचुनाव हुए हैं।1951 से 1971 तक जनसंघ ने कांग्रेस से सीट छीनने की कोशिश तो बहुत की लेकिन कभी कामयाब नहीं हो सकी।इस सीट पर कांग्रेस से इतर जनता पार्टी को पहली बार सफलता 1977 में मिली।जनता पार्टी के जुल्फिकार उल्ला ने जीत दर्ज की। पहली बार इस सीट से 1951 में कांग्रेस के बीवी केसकर जीतकर सांसद पहुंचे। इसके बाद 1957 में कांग्रेस से पं. मदन मोहन मालवीय के पुत्र गोविन्द मालवीय, 1962 में कुंवर कृष्णा वर्मा, 1967 में गनपत सहाय और 1971 में केदार नाथ सिंह चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

कांग्रेस को पहली बार मिली हार–

सुल्तानपुर सीट पर 1977 में कांग्रेस को पहली हार का मुह देखना पड़ा था।हालांकि, इस सीट पर 1980 में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की और 1984 में दोबारा जीत मिली।लेकिन इसके बाद कांग्रेस को इस सीट पर जीत के लिए काफी सालों तक इंतजार करना पड़ा।2009 में कांग्रेस से संजय सिंह ने जीतकर कांग्रेस के नाम किया।

बीजेपी का खुला खाता–

साल 1989 में जनता दल से रामसिंह सांसद बने।90 के दशक में राममंदिर आंदोलन के दौर में बीजेपी इस सीट पर कमल खिलाने में कामयाब रही थी। 1991 से लेकर 2014 के बीच बीजेपी ने चार बार जीत हासिल की है। 1991 और 1996 में विश्ननाथ शास्त्री जीते।1998 में देवेन्द्र बहादुर राय और 2014 में वरुण गांधी।वहीं, बसपा ने इस सीट पर दो बार जीत हासिल की है। लेकिन दोनों बार सांसद अलग रहे हैं। पहली बार 1999 में जय भद्र सिंह और 2004 में मोहम्मद ताहिर खान बसपा से सांसद चुने गए।

सुल्तानपुर सीट का वोटिंग पैटर्न–

सुल्तानपुर लोकसभा सीट की अपनी एक खासियत है।बीजेपी के सांसद देवेन्द्र बहादुर राय को छोड़ दे तो दूसरा कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो इस सीट पर लगातार दूसरी बार सांसद बनने में कामयाब रहा हो। यही वजह रही कि इस सीट पर किसी एक नेता का कभी दबदबा नहीं रहा है। आजादी के बाद कांग्रेस यहां 8 बार जीती, लेकिन हर बार चेहरे अलग रहे।इसी तरह से बसपा दो बार जीती और दोनों बार चेहरे अलग-अलग थे। जबकि बीजेपी चार बार जीती जिसमें तीन चेहरे शामिल रहे।

सामाजिक ताना-बाना–

सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर 2011 के जनगणना के मुताबिक कुल जनसंख्या 2352034 है। इसमें 93.75 फीसदी ग्रामीण औैर 6.25 शहरी आबादी है।अनुसूचित जाति की आबादी इस सीट पर 21.29 फीसदी हैं और अनुसूचित जनजाति की आबादी .02 फीसदी है। इसके अतिरिक्त मुस्लिम, ठाकुर और ब्राह्मण मततादाओं के अलावा ओबीसी की बड़ी आबादी की भी इस क्षेत्र में हार- जीत तय करने में अहम भूमिका रही है।

वर्तमान मे पांच में चार विधान सभाओं पर बीजेपी का कब्जा–

गोमती किनारे बसे सुल्तानपुर लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें इसौली, सुल्तानपुर, सदर, कादीपुर (सुरक्षित) और लम्भुआ सीटें आती हैं।मौजूदा समय में इनमें चार सीटों पर बीजेपी का कब्जा हैं और महज एक सीट इसौली सपा के पास है।

2014 का जनादेश–

2014 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर सीट पर 56.64 प्रतिशत मतदान हुए थे। इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार वरुण गांधी ने बसपा उम्मीदवार को 1 लाख 78 हजार 902 वोटों से मात दी थी।इस तरह 1998 के बाद बीजेपी इस सीट पर कमल खिलाने में कामयाब हुई थी।वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा सकी थी।

बीजेपी के वरुण गांधी को 4,10,348 वोट मिले–

बसपा के पवन पांडेय को 2,31,446 वोट मिले–

सपा के शकील अहमद को 2,28,144 वोट मिले–

कांग्रेस के अमिता सिंह को 41,983 वोट मिले। बड़ी बात यहा यह है कि 2009 के लोकसभा निर्वाचन मे पहले स्थान पर डा. संजय सिंह रहे और चौथे स्थान पर भाजपा प्रत्याशी सूर्यभान सिंह रहे वही 2014के चुनाव मे भाजपा के वरूण गांधी पहले स्थान पर रहे तो चौथे स्थान पर कांग्रेस की डा. अमिता सिंह रही।दोनो चुनाव मे अन्य दल बसपा दूसरे और सपा तीसरे स्थान पर ही अपनी पकड़ बनाये रखा।

सांसद का रिपोर्ट कार्ड–

सुल्तानपुर लोकसभा सीट से 2014 में जीते वरुण गांधी का लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन रहा है।पांच साल चले सदन के 321 दिन में वो 239 दिन उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने 416 सवाल उठाए और 16 बहसों में हिस्सा लिया। दिलचस्प बात ये है कि वरुण गांधी 9 बार निजी विधेयक लेकर आए।इतना ही नहीं उन्होंने पांच साल में मिले 25 करोड़ सांसद निधि में से 21.36 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च किया।

वर्तमान समय मे सुलतानपुर लोकसभा के रणक्षेत्र मे भाजपा अपनी यह सीट बरकरार रखने के लिये प्रत्याशी के रूप मे सांसद वरुण गांधी की मां केन्द्रीय मन्त्री मेनका गान्धी है तो कांग्रेस से दिग्गज नेता राज्यसभा सांसद अमेठी नरेश डा. संजय सिंह है सपा बसपा गठबन्धन ने अबकी बार सुलतानपुर के बाहुबली नेता पूर्वविधायक चन्द्रभद्र सिंह सोनू पर दांव लगा चुनावी वैतरणी पार लगाने की जुगत मे है।आने वाले समय मे सुलतानपुर लोकसभा का चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो आने वाले 23 मई को ही पता चलेगा।