जगदीश यादव
कोलकाता। मौसम चुनावी हो और में शराब का जिक्र नहीं हो। आमतौर पर ऐसा हो ही नहीं सकता। चुनाव के दौरान मतदाताओं के वोंट को राज्य में शराब और पैसे के जोर पर खरीदने के आरोप शायद इसी वजह से लगते रहे हैं। शराब के शौकीन चुनाव के दौरान इतना जाम छलकाते हैं कि राज्य में अचानक शराब की बिक्री में बेतहाशा वृध्दि हो जाती है। जनाबे अली यकिन मानिये यह एकदम सच है। शराब के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश करने वालों पर इस बार चुनाव आयोग की सख्त नजर है। आयोग ने शराब की बिक्री पर उत्पाद और मद्य निषेध विभाग को इसके लिए चुनाव आयोग ने खास दिशा- निर्देश दिया है।

इसके बाद भी अपने स्तर पर आयोग चुनाव के दौरान शराब के सहारे चुनाव प्रभावित कर सकने वाले लोगों पर खास नजर रख रहा है। सिर्फ यही नही आयोग ने इस मामले पर ज्यादा ही सख्त हो गया है। आयोग के निर्देश पर सैंकड़ों शराब की नई दुकानों पर समसामयिक तौर पर ताला लग सकता है। यानी चुनावी प्रक्रिया का समापन तक सैंकड़ों शराब की नई दुकानों में किसी तरह का लेन देन व बिक्री नही हो इसके तहत आयोग ने निर्देश जारी किया है।

हाल ही में चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार राज्य के सभी जिलाधिकारियों और आबकारी अधिकारियों को उक्त मामले की जानकारी भेज दी गई है। 1 जनवरी 2019 से आबकारी अधिनियम 2003 के 4 (क्यू) के अनुसार अगले आदेश तक जिन शराब की दुकानों को लाइसेंस जारी किए गए थे सभी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा। यहां तक कि नई दुकानों के निर्माण,जमीन या लाइसेंस की सभी प्रक्रियाएं बंद रहेगी। आबकारी विभाग के अनुसार इस अधिसूचना के कारण पश्चिम मेदिनीपुर में लगभग 35 दुकानें बंद हो गईं।पूर्व मेदिनीपुर में कम से कम 30 दुकानों पर इस फरमान का असर साफ दिख रहा है।

वही इस अधिसूचना के कारण उत्तर 24 परगना की लगभग 40 दुकानें बंद हैं।शराब के सहारे वोट पाने वालों पर इस बार चुनाव आयोग की सख्त नजर है। आयोग ने उत्पाद और मद्य निषेध विभाग को इस बाबत दिशा- निर्देश जारी किया है। इसके तहत एकमुश्त शराब खरीदने वाले लोगों पर नजर रखी जाएगी। वहीं शराब दुकानदारों को बड़ी संख्या में शराब खरीदने वालों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस वजह से उत्पाद विभाग ने सभी अनुज्ञप्ति प्राप्त दुकानों को बिक्री रजिस्टर अपडेट रखने को कहा है।

मामले पर जब कुछ शराब प्रेमियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग उन लोगों पर नजर रखे जो वोंट के बदले शराब बितरित करते है। हम लोग तो अपने पैसे से पिते है तो भला उक्त फरमान का क्या मतलब है।