कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के मौके पर दावा किया है कि जल्द कोलकाता में ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के उपचार और प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था होगी।आज सुबह मुख्यमंत्री ने इस बारे में ट्वीट किया है। इसमें मुख्यमंत्री ने कहा है कि आज विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस है। हमें लोगों में आत्मकेंद्रित के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करनी चाहिए। इधर सीएम ममता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अंतर्राष्ट्रीय बाल पुस्तक दिवस के मौके पर कहा है कि उन्होंने बच्चों के लिए कई शानदार किताब लिखी है। आज सुबह मुख्यमंत्री ने इस बारे में ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि आज अंतर्राष्ट्रीय बाल पुस्तक दिवस है। हमें छोटे बच्चों में पढ़ने की आदत डालनी चाहिए ताकि वे अपने दिमाग का विस्तार कर सकें। मैंने बच्चों के लिए कई किताबें लिखी हैं, जिनमें तुकबंदी की किताबें भी शामिल हैं। सभी को मेरी शुभकामनाएं। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र की पहल पर दो अप्रैल को दुनिया भर में बाल पुस्तक दिवस मनाया जाता है। इस बार का थीम है किताबों से बढ़ती बच्चों की दूरियों को कम करना। किताबें ही लोगों की सच्ची दोस्त होती हैं। इन्हीं किताबों से अर्जित किया गया ज्ञान भविष्य में आगे की राह दिखाता है। इसकी शुरुआत बचपन से ही हो जाती है, लेकिन बदलते समय में बच्चों और साहित्य के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। आज अंतरराष्ट्रीय बाल पुस्तक दिवस है।
कुछ दशकों पहले तक बच्चों के हाथ में किताबें हुआ करती थीं, अब उनके हाथों में मोबाइल दिखता है, वह कंप्यूटर पर गेम खेलते नजर आते हैं। वर्तमान हालात ये हैं कि बच्चे कोर्स की किताबें के अलावा शायद ही कुछ पढ़ते हों। यह एक बेहद चिंता का विषय है। पहले गर्मी की छुट्टियों में बच्चे कॉमिक्स खरीदने की जिद किया करते थे। अखबार वाले से कहकर महीने में एक बार या 15 दिनों में आने वाली कॉमिक्स का इंतजार करते थे और जैसे ही कॉमिक्स आती थी अगले दिन ही उसे पढ़कर खत्म कर जाते थे। यहां तक कि दुकानों से किराए पर कॉमिक्स खरीदकर भी पढ़ते थे। धीरे-धीरे समय के साथ वीडियो गेम और कम्प्यूटर गेम्स और मोबाइल का चलन बढ़ता गया और अब बच्चे कॉमिक्स कि दुनिया से दूसरी तरफ मुड़ने लगे। इस बार अंतर्राष्ट्रीय बाल पुस्तक दिवस तक के बच्चों को किताबों की ओर मोड़ने का है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि कोलकाता में एक विश्वस्तरीय ऑटिज्म टाउनशिप विकसित किया जा रहा है, जहां ऑटिस्टिक बच्चों और वयस्कों को प्रशिक्षण, उपचार और बोर्डिंग की सुविधा मिलेगी। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। दो अप्रैल 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिन को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस घोषित किया था। पूरे विश्व में आत्मकेंद्रित बच्चों और बड़ों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों को प्रोत्साहित करता है और पीड़ित लोगों को सार्थक जीवन बिताने में सहायता देता है। नीले रंग को ऑटिज्म का प्रतीक माना गया है। इस बीमारी की चपेट में आने के बालिकाओं के मुकाबले बालकों की ज्यादा संभावना है। वही ममता बनर्जी ने विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के मौके पर कहा कि इस बीमारी को पहचानने का कोई निश्चित तरीका अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है। दुनिया भर में इस बीमारी से ग्रस्त लोग हैं जिनका असर परिवार, समुदाय और समाज पर पड़ता है। ऑटिज्म एक आजीवन न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जो लिंग, जाति या सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बावजूद बचपन में हो जाती है। यानी यह एक प्रकार का मानसिक रोग है जो विकास से सम्बंधित विकार है, जिसके लक्षण जन्म से या बाल्यावस्था यानी प्रथम तीन वर्षों में ही नज़र आने लगते है। ये बिमारी पीड़ित व्यक्ति की सामाजिक कुशलता और संप्रेषण क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालता है। इस रोग से पीड़ित बच्चों का विकास अन्य बच्चों की अपेक्षा असामान्य होता है। ऐसे बच्चे एक ही काम को बार-बार दोहराते है