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सरकारों की तरफ से दी जाने वाली छूट के लिए बड़े उद्योगपति हमेशा ही चर्चा में रहते है.अब गुजरात सरकार ने अडाणी,एस्सार और टाटा समूहों को बड़ी छूट दी है.इसमें बिजलीघरों को राहत देते हुए सरकार ने कोयले की ऊंची लागत का भार अंतिम उपभोक्ता को स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी है. सरकार ने यह आदेश शनिवार को दिया था. जबकि इसकी जानकारी एक सूत्र द्वारा सोमवार को दी गयी है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने टाटा पावर, अडाणी पावर (4600 मेगावॉट) और एस्सार पावर (1320 मेगावॉट) को आयातित कोयले की ऊंची लागत का भार स्थानांतरित करने के लिए किसी तरह के क्षतिपूरक शुल्क के खिलाफ व्यवस्था दी थी.इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी टाटा पावर ने सोमवार को मुंबई शेयर बाजार को भेजी सूचना में कहा कि कंपनी गुजरात सरकार द्वारा एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के प्रस्ताव का स्वागत करती है. इससे मुंदड़ा अति वृहद बिजली परियोजना को कुछ राहत मिलेगी, जो गुजरात की करीब 15 प्रतिशत बिजली की जरूरत को उचित मूल्य पर पूरा करती है.

इस सरकारी आदेश में कहा गया है कि इस राहत से कोस्टल गुजरात पॉवर को अपना  परिचालन जारी रखने और पांच लाभार्थी राज्यों के लिए ज़िम्मेदारी को पूरा करने में मदद मिलेगी. टाटा पॉवर ने कहा है कि कोयले की लागत को अब आगे ट्रांसफर किया जा सकेगा. लेकिन इसके बावजूद वित्त की लागत पर रियायत तथा कोयला खानों का लाभ लाभार्थी राज्यों को ट्रांसफर किए जाने से कंपनी का घाटा जारी रहेगा.इसी मामले में सरकार ने आदेश दिया है कि कंपनी की लागत का खर्च बिजली ग्रहकों पर डाला जायेगा.जिससे कि कंपनी के घाटे को कम से कम किया जा सके और कंपनियों की सेवाएं राज्य में बनी रहें.ताकि राज्य में बिजली व्यवस्था बनी रहे और विकास कार्य सुचारु रूप से चलते रहे.जनता को इनका लाभ मिलता रहे.