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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा वायु सेना के लिए 36 विमान की कीमत को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है.राफेल डील विवाद की चिंगारी राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी पहुंच चुकी है.
राफेल को लेकर भारत के बाद अब फ्रांस में भी राफेल का मुद्दा गर्माता जा रहा है. फ्रांस के एक एनजीओ ने भारत के साथ हुई राफेल सौदे को लेकर देश के वित्तीय मामलों के लोक अभियोजक दफ्तर (प्रॉसिक्यूटर ऑफिस) में एक शिकायत दर्ज कराई है और इस मामले में जांच किए जाने की मांग की है. शेरपा नाम की ये एनजीओ आर्थिक अपराधों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ती है. राफेल सौदे में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए आर्थिक अपराधों के खिलाफ लड़ाई छेड़ने वाले फ्रांसीसी एनजीओ ने वहां के लोक अभियोजक दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई है.

एनजीओ द्वारा कराई गई शिकायत में तथ्यों को गंभीरता से जांच कराने की मांग उठी है. आखिर किस नियम के तहत भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमानों का सौदा हुआ है. इसके अलावा राफेल विमान कंपनी दसॉल्ट एविएशन की ओर से किस आधार पर भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर के रूप में चुना गया। शेरपा नामक एनजीओ ने कहा है कि उसकी यह शिकायत पूर्व मंत्री और एक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले वकील की ओर से सीबीआई में दायर शिकायत के आधार पर की गई है. ये शिकायत 26 अक्टूबर को की गई थी, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि जांच शुरू हुई है या नहीं. बता दें कि राफेल का मुद्दा इन दिनों सुर्खियों पर है मामले की जांच स्पष्टिकरण होने के बाद ही संभव होगा.

आपको दें कि 36 राफेल विमानों के सौदे को लेकर भारत में पिछले काफी समय से राजनीतिक घमासान मचा हुआ है. पिछले दिनों से विपक्षी पार्टीया लगातार विमानों की जांच की मांग कर लगातार केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं.