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लाओत्से चीन का एक बड़ा दार्शनिक माना जाता है । एक बार कहानी ये है कि चीन के एक बड़े पहलवान ने चुनौति दे दी कि कोई उसे हरा नहीं सकता है। ऐसे में किसी सिरफिरे ने पहलवान के सामने गुजर रहे लाओत्से को खड़ा कर दिया और कह दिया कि यही तुमको हराएगा। फिर क्या था लाओत्से को भीड़ के सामने ये कबूल करना पड़ा कि वो पहलवान ये कुश्ती लड़ेगा। लेकिन लाओत्से ने पहलवान से कहा कि वो उससे लड़ेगा तो लेकिन उसे तैयारी के लिए कम से कम एक महीने का वक्त चाहिए।

धीरे धीरे पूरे चीन में ये बात फैलने लगी कि दुबले पतले कमजोर से लाओत्से और इस महान पहलवान मे कुश्ती होने वाली है। धीरे धीरे लोग दो गुटों में बंटने लगे। ज्यादातर लोग पहलवान के पक्ष में थे। लेकिन कुछ लोग लाओत्से पर भी दांव लगा रहे थे। एक तरह से पूरा चीन बंट गया । कौन जीतेगा कौन हारेगा इसको लेकर बेटिंग शुरु हो गई। करोड़ो रुपये के बराबर के दांव दोनों के नाम पर लग गए।

प्रतियोगिता का दिन आ गया जिसका सबको इंतज़ार था। लाओत्से मैदान में पहलवान के सामने पहुंचा। पहलवान ने जैसे ही उसको कुश्ती के लिए ललकारा लाओत्से ने कहा कि वो कुश्ती नहीं लड़ेगा। फिर पहलवान ने कहा कि यानि तुम हार गए। तुमने हार मान ली। लाओत्से ने कहा कि नहीं मैंने हार नहीं मानी है । मैं बस तुमसे लड़ नहीं रहा। अब पहलवान ने गुस्से में कहा कि लड़े नहीं तो हार ही तो गए ना।

लाओत्से ने कहा कि जब लड़े ही नहीं तो कैसी हार और कैसी जीत। जब प्रतियोगिता हुई नहीं। मैं तुमसे लड़ा ही नहीं तो हार कैसे गया। इसके लिए तो लड़ाई होनी जरुरी है। मैं तुमसे लड़ुंगा ही नहीं फिर हारुंगा भी नहीं और न तुम जीत पाओगे। इसका जवाब पहलवान के पास भी नहीं था क्योंकि लाओत्से तो ठीक ही कह रहा था कि जब लड़ाई ही नहीं करेंगे तो हार जीत कहां से होगी।

केजरीवाल ने इस बार मोदी के लिए बिल्कुल लाओत्से वाला खेल खेला है। केजरीवाल पिछले दो सालों से लाओत्से बने हुए हैं। न सीधे सीधे मोदी से लड़ेंगे न फंसेगे और न हारेंगे। यहीं राहुल गांधी मात खा गए । वो समझ नहीं पाए कि हाउ टू इग्नोर एलिफैंट इन योर रुम।

मोदी हमेशा चाहते हैं कि सीधी लड़ाई हो। लोग मोदी की आलोचना करने में अपना वक्त गंवाएं और गलतियां करें । जैसे ही गलतियां करेंगे मोदी जीतेंगे और सामने वाला हार जाएगा। केजरीवाल ने ये रणनीति समझ ली है। अब वो लाओत्से हो गए हैं। तभी पाकिस्तान के मंत्री के बयान पर भी उन्होंने ऐसा जवाब दिया कि बीजेपी के पास उनकी आलोचना करने का कोई मौका ही नहीं है। काश कांग्रेस में कोई लाओत्से होता।

(अजीत कुमार मिश्रा)