कोलकाता। अब महानगर कोलकाता की मस्जिदों में महलाएं भी नमाज अता कर सकेगी। महानगर की नाखुदा और टीपू सुल्तान मस्जिदों में महिलाओं को भी नमाज पढ़ने की इजाजत दी जा रही है। ऐसे में मुस्लिम महिलाओं के एक बड़े तबके में इस बात से खुशी की लहर उमड़ पड़ी है। टीपू सुल्तान शाही मस्जिद के तौर पर विख्यात है, जबकि नाखुदा मस्जिद को बड़ी मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। मुगल जमाने से ही कोलकाता की ये दोनों मस्जिद अल्पसंख्यकों के लिए केंद्र बिंदू रहे हैं। बताया गया है कि बंगाल इमाम एसोसिएशन की ओर से लिखित तौर पर मांग किए जाने के बाद मस्जिद कमेटी ने महिलाओं को नमाज पढ़ने की इजाजत देने का निर्णय किया है। इसके लिए सारी व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।

इन दोनों मस्जिदों में महिलाओं के लिए अलग से हॉल होगा, जहां वो नमाज़ अता कर सकेंगी। इसके अलावा मस्जिद में आने-जाने के लिए अलग से दरवाजा होगा। साथ ही अलग शौचालय की व्यवस्था भी की जाएगी। नाखुदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने बताया कि ‘हमें इस संबंध में पत्र मिला है। प्रबंध समिति महिलाओं के लिए बेहतर व्यवस्था करेगी। कई महिलाएं मस्जिद में नमाज अता करने आती हैं।

महिलाएं एक कोने में बैठकर नमाज अता करती हैं।’ उन्होंने कहा कि मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश के लिए तीन में से एक दरवाजे को आरक्षित किया जाएगा। उनके बैठने के लिए जगह भी आरक्षित होगी।साथ ही अन्य मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि टीपू सुल्तान मस्जिद को वर्ष 1842 में प्रिंस गुलाम मोहम्मद ने बनवाया था। वे टीपू सुल्तान के सबसे छोटे बेटे थे। नाखुदा मस्जिद बनने की शुरुआत वर्ष 1926 में हुई थी।

इन दोनों मस्जिदों में नमाज अता करने संबंधी चिट्ठी में इमाम एसोसिएशन ने कहा है कि कई बार विदेशी महिलाएं कोलकाता आती हैं। शरीयत के अनुसार उन्हें नमाज अता करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए मस्जिदों में अलग से हॉल और नमाज वाली जगह पर पर्दा लगाया जाए।