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पिछले हफ्ते पेश हुए बजट में एक नया प्रावधान पास कराया गया है। राजनीतिक दलों को अब विदेश से मिलने वाले चंदे की जानकारी देनी होगी।राजनीतिक दलों पर नजर रखने वाली संस्था असोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स ADR द्वारा हाल में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक पार्टियों को विदेश से मिलने वाले चंदे में कई तरह की गड़बड़ियां थी। चंदा देने वाली कम्पनियों के रिकॉर्ड और दस्तावेज अधूरे थे। एक बात ये भी सामने आई थी कि चंदे का ज्यादातर हिस्सा बीजेपी को मिला है। ये रिपोर्ट साल 2016-17 और 2017-18 में मिले चंदे पर आधारित थी। राष्ट्रीय पार्टियों को मिलने वाले चंदे में करीब 22 करोड़ रुपए ऐसी कम्पनियों से मिले जिनके बारे में ये बात स्पष्ट नहीं थी कि वो क्या काम करती हैं।वहीं करीब 120 करोड़ देने वाली 916 कंपनियों के पते का जिक्र नहीं था. 76 कंपनियां ऐसी थी जिनके PAN खातों की जानकारी नहीं थी।
नए प्रावधान का सरकार और विपक्षी दलों के नेताओं ने स्वागत किया है। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि मैं इसके पक्ष में हूं, पारदर्शिता होनी चाहिए। वहीं बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा ने कहा कि चुनाव सुधार की दिशा में अच्छा कदम है। इससे किसी भी पार्टी को नुकसान या लाभ नहीं होगा।