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बजट 2020 में सरकार ने जो सबसे बड़ा और साहसिक कदम उठाया है वो है एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी को कम करना । भ्रष्टाचार की गंगोत्री एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी को बेच कर सरकार इसे एकाउंटेबल बनाने जा रही है और इससे उन सारे घोटालों पर लगाम लगेगी जो अब तक हमारे प्रीमियम के पैसे से होता रहा था। एल आई सी देश की सबसे बड़ी वित्तीय संस्था है जिसकी मार्केट वैल्यूएशन साल 2018 में लगभग 31 लाख करोड़ के आस पास थी।

एल आई सी हमारी बीमा के प्रीमियम के पैसों को कई वित्तीय संस्थाओ में लगाती थी।हमारे प्रीमियम के पैसे जो हम बड़ी मेहनत से कमा कर अपने जीवन को सुरक्षित करने में लगाते थे उसे पहले के सरकारों के मंत्रियों और अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार के महाभोज में लगाया जाता था। इसका सबसे ताजा उदाहरण है आई एल एंड एफ एस का घोटाला । इसमें भ्रष्ट अधिकारियों और मंत्रियों ने मिल कर 35000 करोड़ के घोटाले में बदल दिया था। इस वित्तीय संस्था में सबसे ज्यादा पैसा एल आई सी का ही लगा था।

ये पैसा हमारे प्रीमियम का था। इसे ऐसी वित्तीय संस्था में लगाया गया था जो लगातार डूब रही थी। लेकिन अब अगर सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचती है तो इसके लिए वो आई पी ओ लाएगी। एल आई सी को शेयर मार्केट में रजिस्टर्ड किया जाएगा( अभी तक ये सरकार की बपौति थी) । आई पी ओ को हम और आप कोई भी खरीद सकेंगे। जब निजी हिस्सेदारी एल आई सी में बढ़ेगी तो निश्चित तौर पर एल आई सी को अपने हिसाब किताब का पूरा ब्यौरा अपने शेयरधारकों को बताना पड़ेगा।

वो अब कहीं भी सरकार के अधिकारियों और मंत्रियों के कहने पर घाटे वाले संस्थाओं में अपना पैसा नहीं लगाएगी। अगर लगाएगी तो इसे अपने शेयरधारकों को जवाब देना पड़ेगा। इस पारदर्शिता की वजह से एल आई सी ज्यादा प्रोफेशनल बनेगी जैसे बाकी बीमा कंपनियां हैं। एल आई सी जिस दिन शेयर मार्केट में पब्लिक कंपनी के रुप में लिस्टेड होगी ये रिलायंस और टाटा से बडी कंपनी के रुप में पहले पायदान पर आ जाएगी।

सरकार ने अपना नियंत्रण एल आई सी में कम कर सच में एक साहसिक कदम उठाया है और इसे आने वाले घोटालों से बचाने के लिए तैयार कर दिया है।

(अजीत कुमार मिश्रा)