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नई दिल्‍ली, 20 जुलाई 2020, (आरएनआई)। रेलवे वर्ष 2023 में पहली 12 जोड़ी निजी ट्रेनों के संचालन की शुरुआत करेगा। इसके अगले वित्तीय वर्ष में 45 और निजी ट्रेनें चलाई जाएंगी। रेलवे ने नई टाइमलाइन जारी करते हुए कहा कि वर्ष 2027 तक रेलवे की सभी 151 निजी ट्रेनों शुरू करने की योजना है।

रेलवे के नेटवर्क पर निजी कंपनियों की ट्रेने चलाने के लिए एक औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। इसी महीने की शुरुआत में रेलवे ने 151 आधुनिक ट्रेनें चलाने के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं।

इस योजना के तहत निजी ट्रेन के संचालन का पहला चरण मार्च, 2023 से शुरू हो जाएगा। इस परियोजना से निजी कंपनियां करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।

इसके अलावा, निजी कंपनियों को रेलवे को उपभोग के हिसाब हाउलेज चार्ज, एनर्जी चार्ज चुकाने होंगे। अधिकारियों का कहना है कि रेलवे को इन 151 ट्रेनों के संचालन से हर साल हाउलेज चार्ज के रूप में तीन हजार करोड़ रुपये मिलेंगे।

इस परियोजना के लिए जरूरी शर्तें रेलवे ने आठ जुलाई को जारी की थीं। अधिकारियों का कहना है कि इन नियम-कायदों पर अंतिम फैसला नवंबर तक ले लिया जाएगा।

इस योजना के टेंडर के लिए बोली मार्च, 2021 में खुलेगी और कंपनियों का चयन अगले साल 31 अप्रैल तक हो जाएगा। विभाग ने अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना की समयसीमा जारी करते हुए 12 निजी ट्रेनें 2022-23 में शुरू करने की घोषणा की है।

आधिकारिक बयान के मुताबिक, 45 निजी ट्रेनें 2023-24, 50 ट्रेनें 2025-26 और 44 से अधिक निजी ट्रेनें उसके अगले वित्तीय वर्ष में शुरू करने की बात कही है।

ऐसे में रेलवे की पूरी कोशिश है कि तय समयसीमा के भीतर इन निजी ट्रेनों को पूरी तरह से शुरू किया जा सके। इसके लिए स्पेशल मैकेनिज्म तैयार किया जा रहा है। इस तरह कुल 151 निजी ट्रेनों का संचालन वित्त वर्ष 2026-27 में शुरू कर दिया जाएगा।

रेलवे ने कहा कि 70 फीसद निजी ट्रेनें भारत में ही बनाई जाएंगी। यह ट्रेने अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों की यात्रा अवधि में 10 से 15 फीसद की कमी आएगी

जबकि 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली निजी ट्रेनों के सफर के समय में 30 फीसद तक की कमी होगी। इन रूटों पर चलने वाली सबसे तेज गति की ट्रेनों से इनके समय का मुकाबला होगा।

निजी ट्रेनों का संचालन करने वाले ड्राइवर और गार्ड भारतीय रेलवे के कर्मचारी ही होंगे। इन ट्रेनों की निगरानी और रखरखाव भारतीय रेलवे के मानकों के अनुरूप ही होगा। इन ट्रेनों को 95 फीसद तक समय से चलना होगा।

एक लाख किलोमीटर की यात्रा में इन ट्रेनों की विश्वसनीयता में विफलता केवल एक बार स्वीकार्य होगी। निजी कंपनियों के इन ट्रेनों के उपयुक्त संचालन में विफल रहने की सूरत में इन कंपनियों पर भारी जुर्माना भी लगेगा।