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कोलकाता, 28 जनवरी 2020, (आरएनआई )। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन बातचीत के लिए उन्होंने सरकार के सामने एक शर्त रखी है। ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि वह पीएम मोदी से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले वो नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को वापस लें।

सीएम ममता ने पीएम मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीर और सीएए पर फैसला लेने से पहले एक भी सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई। एनआरसी, एनपीआर और सीएए ये तीनों देश के लिए खराब हैं। हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले वो एनआरसी को वापस लें।

चित्रों के माध्यम से सीएए के विरोध में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह एनआरसी, एनपीआर और सीएए को स्वीकार नहीं करेंगी। उन्होंने कहा, हम एक अखंड भारत चाहते हैं, हम एकजुट बंगाल चाहते हैं। हम सीएए, एनआरसी और एनपीआर को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सचिवालय में मुलाकात की। अभिजीत के साथ उनकी माता निर्मला बनर्जी ने भी ममता से मुलाकात की।

केरल, पंजाब और राजस्थान की राह पर चलते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित हो गया। पश्चिम बंगाल के संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) विरोधी प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी माकपा और कांग्रेस से अपील करते हुए कहा कि संकीर्ण राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर केंद्र में फासीवादी भाजपा सरकार के खिलाफ एक साथ लड़ें। उन्होंने एनपीआर, एनआरसी और सीएए परस्पर संबंधित बताते हुए कहा कि नया नागरिकता संशोधन कानून जनविरोधी और संविधान विरोधी है। हम चाहते हैं कि इस कानून को तुरंत निरस्त किया जाए।