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पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया उन सभी ख़बरों की कड़े शब्दों में निंदा करता है, जिन्हें विभिन्न न्यूज़ चैनलों ने इस तरह से बयान किया है कि सीएए-विरोधी प्रदर्शनों को भड़काने के लिए पॉपुलर फ्रंट ने बड़ी रक़म खर्च की है। सबसे पहली बात यह है कि न्यूज़ चैनलों ने इस रिपोर्ट को ‘‘अज्ञात स्रोतों’’ के हवाले से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से बताया है। लेकिन ईडी ने न तो हमारे संगठन से कोई संपर्क किया है और न ही इन आरोपों के बारे में अपना कोई बयान जारी किया है।

ख़बर में 73 बैंक खातों को पॉपुलर फ्रंट से जोड़ा गया है और कहा गया है कि सीएए-विरोधी प्रदर्शनों की फंडिंग के लिए पॉपुलर फ्रंट के इन ‘‘तथाकथित’’ खातों से 120 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। पॉपुलर फ्रंट बार-बार इस बात को बयान करता रहा है कि हम देश के क़ानून का पूरा पालन करते हैं और सीएए-विरोधी प्रदर्शनों से ठीक पहले पॉपुलर फ्रंट के खातों से 120 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है और जो लोग यह आरोप लगा रहे हैं, उन्हें चाहिए कि वे अपने दावों को साबित करें।

दूसरी बात कुछ न्यूज़ चैनलों ने यह आरोप भी लगाया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खाते से कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे और इंदिरा जयसिंह जैसे वकीलों को बड़ी रक़म ट्रांसफर की गई है। इस बयान ने इन गलत नियत रखने वाले लोगों के असल इरादे को बेनक़ाब कर दिया है, जो देश में होने वाली हर एक घटना का आरोप पॉपुलर फ्रंट पर लगाने की ताक में रहते हैं। हकीकत यह है कि उपरोक्त वकीलों को यह रकम 2017 में हादिया केस की फीस के तौर पर दी गई थी। पॉपुलर फ्रंट ने विभिन्न सभाओं में इसका खुले तौर पर ऐलान भी किया है। यह कोई ढकी छुपी बात नहीं है। 2017 में फीस के रूप में ट्रांसफर की गई रक़म को 2019 के सीएए-विरोधी प्रदर्शनों की फंडिंग से जोड़ना बड़ी बेतुकी बात है, इससे पॉपुलर फ्रंट को बिना किसी कारण के बदनाम करने की साज़िश का पर्दा फाश हो गया है।

एक दूसरा आरोप यह लगाया गया है कि पॉपुलर फ्रंट के तथाकथित कश्मीर विंग को भी रक़म ट्रांसफर की गई है। यह एक खुली सच्चाई है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की जम्मू-कश्मीर में कोई ब्रांच या विंग नहीं हैं। हम इन तथाकथित ‘‘अज्ञात स्रोतों’’ को चुनौती देते हैं कि वे यह साबित करके दिखाएं कि पॉपुलर फ्रंट की कोई विंग कश्मीर में काम कर रही है। साल 2014 में जब कश्मीर में बाढ़ आई थी, उस समय पॉपुलर फ्रंट ने बड़े पैमाने पर राहत सेवाएं दी थीं और बाढ़ पीड़ितों के लिए 100 घर बनाकर दिए थे। जिसके बारे में खुद संगठन ने 2014 में अपने ऑफिशियल प्रकाशनों में बाकायदा ऐलान किया था। 2014 की बाढ़ राहत सेवाओं को सीएए-विरोधी प्रदर्शनों की फंडिंग के रूप में पेश करना यह स्पष्ट करता है कि पॉपुलर फ्रंट की तरक्की को रोकने के लिए उसे बदनाम करने का मंसूबाबंद अभियान चलाया जा रहा है।

हमें पूरा विश्वास है कि आरोपों के इस नए सिलसिले का भी वही अंजाम होगा जो इससे पहले के आरोपों का हुआ था, जिन्हें आज तक साबित नहीं किया जा सका है और न कभी किया जा सकेगा। हाल के दिनों में यूपी और असम सरकारों ने सीएए-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक घटनाओं में पॉपुलर फ्रंट का हाथ होने का आरोप लगाया था और हमारे कुछ प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को गिरफ्तार भी किया था। लेकिन उस समय उनके तमाम दावे केवल काल्पनिक कहानियां बनकर रह गए, जब वे अदालत में कुछ भी साबित नहीं कर पाए और हमारे पदाधिकारियों को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया।

जो फासीवादी लोग हमें रोकना चाहते हैं, उनकी सरपरस्ती में यह ताक़तें इस प्रकार का घटिया अभियान चला रहे हैं। लेकिन पॉपुलर फ्रंट उनकी इन कोशिशों के आगे कभी झुकने वाला नहीं है। हम फासीवादी ताक़तों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे, जो विरोध की हर आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही हैं।

एम. मोहम्मद अली जिन्ना
राष्ट्रीय महासचिव
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया