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मुज़फ़्फ़रपुर, 24 सितंबर 2019, (आरएनआई)। गायघाट प्रखंड क्षेत्र के जारंग पश्चिमी पंचायत के चन्द्रहास नगर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्री मद् भागवत कथा के छठे दिन कथा में स्वामी अभयानंद जी महाराज ने बताया कि भगवान ने वृंदावन लीलाओं मै वेणुगीत का वर्णन किया । शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान का वंशी बजाना और गोपियों के आगमन भगवान औऱ गोपियों के सम्बाद मै रासोत्सव और यह रासोत्सव 5 अध्यायों में वर्णित है। जिसे रास पंचाध्यायी भी कहते हैं। भगवान ने यह रास गोपियों के साथ इस लिये रचा था ताकि जीवो को सबसे श्रेष्ठ आनंद का लाभ प्रदान किया जा सके। इस रास पंचाध्यायी में गोपी गीत आता हैं। जिसमें गोपियों ने करुण स्वर में भगवान को पुकारती हैं तो जो जीव गोपी गीत का नित्य पाठ करता है । उसे एक दिन भगवान का दर्शन प्राप्त होता हैं। जो जीव इस सम्पूर्ण रासपंचाध्यायी का पाठ करता है तो उसका ह्रदय रोग समाप्त हो जाता हैं ।ऐसा यह दिव्य रासोत्सव हैं शंखचूड़ वध युग्मगीत अरिष्टासुर वध केशी वध नारद जी द्वारा भगवान का स्तवन व्योमासुर वध अक्रूर जी का वृंदावन आगमन और भगवान श्री कृष्ण, बलराम जी साथ मथुरा गमन अक्रूर जी द्वारा भगवान की स्तुति रजक वध कुब्जा पर कृपा धनुष भङ्ग कुँवलयापीठ वध और कंस वध करके अपने माता पिता को बन्धन मुक्त किया था। उग्रसेन का राज्य भिषेक भगवान ने गुरुकुल जाकर यह बताया कि गुरु का महत्व मनुष्य के लिए कितना महत्व रखता है । जब भगवान जो इस सम्पूर्ण स्षिटि के रचयिता हैं उनको भी गुरु के पास जाना पड़ा। इस लीला से भगवान यह बताना चाहते की प्रत्येक जीव को गुरु का सानिध्य प्राप्त करना चाहिए ।यह जीव मात्र का धर्म है उद्धव गोपी सम्बाद मैं भ्रमर गीत का वर्णन भगवान का जरासन्ध से युद्ध औऱ भगवान का द्वारकापुरी का निर्माण कालयवन विनाश मुचकुंद ऋषि के द्वारा भगवान की स्तुति बलराम जी का विवाह श्री कृष्ण भगवान को रुक्मिणी जी का संदेश और भगवान का कुंडनपुर गमन रुक्मिणी जी का हरण और रुक्मिणी जी के साथ विवाह हुआ ।इस दौरान मौके पर मुखिया मनिष भारद्वाज, पूर्व पंसस राजु कुमार, प्रेम शंकर सिंह, जयप्रकाश कुंवर, प्रकाश कुंवर, बैधनाथ कुवंर, शिवजी राय आदि थें.