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लखनऊ, 08 जनवरी 2020, (आरएनआई )। राजधानी लखनऊ के कृष्णानगर इलाके के दामोदरनगर में सोमवार रात एक वकील शिशिर त्रिपाठी की ईंट-पत्थर से कूंच कर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, मामला आपसी रंजिश का है। 32 वर्षीय शिशिर की हत्या में तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले में इंस्पेक्टर कृष्णानगर प्रदीप कुमार सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। उनकी जगह निरीक्षक अपराध राम कुमार को कृष्णानगर थाने का कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, मामले के मुख्य आरोपी मोनू तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एक अन्य आरोपी अधिवक्ता विनायक ठाकुर को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य की तलाश के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। पुलिस को मोनू तिवारी पर पहले से ही शक था। हत्या के बाद से ही उसकी तलाश शुरू कर दी गई थी।

वहीं, हत्या के बाद शिशिर के शव का पोस्टमार्टम किया गया। जिसके बाद साथी अधिवक्ता शिशिर के शव को लेकर कोर्ट रूम पहुंच गए हैं। यह इतिहास में पहली बार है जब वकील लाश लेकर कोर्ट पहुंचे।

साथी वकील लगातार खराब कानून व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मामले की जानकारी पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी कलेक्ट्रेट पहुंचे।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी शिशिर त्रिपाठी की हत्या पर ट्वीट कर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि सोराँव के विजयशंकर तिवारी और शामली के अजय पाठक की हत्या के बाद अब लखनऊ में अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई। क्या प्रदेश पूरी तरह से अपराधियों के हाथ में है? भाजपा सरकार कानून व्यवस्था के बारे में पूरी तरह फेल है।

अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की हत्या पर सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ ने जिलाधिकारी लखनऊ के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजा जिसमें एसोसिएशन ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी करने के साथ ही परिवार के लिए सहायता की मांग की।

एसोसिएशन ने कहा कि अधिवक्ता के परिजनों को एक करोड़ रुपये सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और एस ओ कृष्णा नगर को तत्काल निलंबित किया जाए।