कोलकाता। चुनावी बयार की राज्य में जबरदस्त असर देखने को मिल रहा है। तमाम राजनीतिक पार्टियों के नेता दावों की बरसात कर रहे है। ऐसे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया है कि इस बार लोकसभा चुनाव में राज्य भर में तृणमूल कांग्रेस की तुलना में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहेगा। आज जारी एक बयान में घोष ने दावा किया है कि राज्य के लोग तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ हैं और भाजपा को विकल्प के तौर पर लाना चाहते हैं। इसलिए अधिकतर सीटों पर पार्टी की जीत होगी। घोष ने मेदिनीपुर लोकसभा सीट से अपनी जीत तय बताते हुए कहा कि प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में सबसे अधिक समय दिया है। यहां के लोग उन्हें बहुत पसंद करते हैं और उसी का परिणाम था कि 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्हें यहां से जीत मिली।

ग्रामीण अंचल होने की वजह से भाजपा की गहरी पैठ इन क्षेत्रों में बनी है और यहां से उनकी जीत होनी निश्चित है। मेदनीपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार मानस भूइयां के बारे में उन्होंने कहा कि मानस 2014 में घटाल लोकसभा सीट से हार गए थे, तब वह कांग्रेस में थे। इसका मतलब यह है कि क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता बहुत अच्छी नहीं है। उसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर माकपा के समर्थन से जीते थे। उसके बाद पुलिस केस की डर से तृणमूल में चले गए। आज हालात ऐसे हैं कि तृणमूल के लोग भी उन्हें बहुत पसंद नहीं करते और कांग्रेसी भी उनके खिलाफ हैं।

माकपा के समर्थक भी खिलाफ हैं, जबकि भाजपा की ओर से जहां मुझे उम्मीदवार बनाया गया है, वहां मेरे खिलाफ पार्टी का कोई कार्यकर्ता नहीं और आम लोग भी पसंद करते हैं। इसीलिए मेरी जीत तय है। पार्टी के कुछ लोकसभा उम्मीदवारों को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी पर सफाई देते हुए घोष ने कहा कि हमारी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। तृणमूल में रहने वाला कोई भी नेता अपनी पार्टी की आईडियोलॉजी के हिसाब से काम करता था। आज जब वह भाजपा में हैं तो नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने और भाजपा को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में किसी को लेकर व्यक्तिगत तौर पर कोई विरोध या दुश्मनी नहीं होनी चाहिए।

राज्य की अधिकतर सीटों पर जीत का दंभ भरते हुए दिलीप घोष ने कहा कि विगत सात साल में तृणमूल कांग्रेस ने इतना अधिक भ्रष्टाचार, हिंसा और अत्याचार किया है कि लोग त्रस्त हो चुके हैं और राज्यभर में आम लोग तृणमूल के खिलाफ खड़े हैं। अब तृणमूल के पास केवल नेता हैं, कार्यकर्ता नहीं। आम लोग भाजपा के साथ खड़े हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस, पुलिस और सरकारी मशीनरी के दम पर चुनाव जीतना चाहती है। ऐसे में एक तरह से देखा जाए तो नैतिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस पहले ही हार चुकी है।

राज्य भर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदूवादी संगठनों के महत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विगत 70 साल से स्वयंसेवक संघ बंगाल में काम कर रहा है। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठन 50 वर्ष से राज्य में सक्रिय हैं। यही कारण है कि भाजपा हाल के कुछ वर्षों में और मजबूत हुई है। इस बार लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर इन संगठनों की बड़ी भूमिका रहेगी।

दिलीप घोष ने कहा कि संघ और अन्य हिंदूवादी संगठनों के स्वयंसेवकों ने राज्य के आम लोगों को समझाया है कि किस तरह से तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाकर भाजपा को विकल्प बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार जंगलमहल, आसनसोल, आसनसोल- दुर्गापुर, श्रीरामपुर, हुगली, कोलकाता और नदिया तथा उत्तर 24 परगना क्षेत्र में भाजपा की जीत तय है।