56 Views

My Name is Shankar but i am not a terrorist..

सीएए, एनआरसी और एनपीआर पर बहुत बातें हो चुकीं.. चीज़ें सब खुल के सामने आ चुकी हैं.. बहुत कुछ कहा जा चुका है मगर यही वो वक़्त है जब कुछ बातें सोचने की हैं, कुछ समझने की हैं और कुछ समझाने की हैं। सीएए, एनआरसी और एनपीआर के पीछे एक आईडियालॉजी है..वो आईडियालॉजी किस की है? उस के रंग रूप किस ने तय किए हैं ? वो आईडियालॉजी इतनी मज़बूत कैसे हुई कि उसने संविधान को भी चपेट में ले लिया…सोचने की ज़रूरत है कि हम आज़ादी से डिटेंशन सेन्टर तक कैसे पहुंच गए…? ये आईडियालॉजी सावरकर की है..वही सावरकर जिसने यहूदियों पर हिटलर के अत्याचार को जस्टीफ़ाई किया था..

उसी आईडियालॉजी के लोग हैं जो सीएए, एनआरसी और एनपीआर की हिमायत में उठ खड़े हुए हैं।
सोचने की ज़रूरत है कि इस आईडीयालोजी की बुनियाद क्या है.. इस आईडियालॉजी का स्रोत क्या है..इस का गढ़ कहाँ है।

ग़ौर से देखिए.. ये आईडियालॉजी उस आईडिया ऑफ इंडिया के ख़िलाफ़ है जो मुहब्बत,भाईचारगी और इन्साफ़-ओ-बराबरी पर आधारित है..ये आईडियालॉजी नफ़रत की आईडियालॉजी है..वो नफ़रत जो अपने इलावा किसी को देखना नहीं चाहती..वो नफ़रत जो अपने इलावा किसी को बर्दाश्त नहीं कर पाती..वो नफ़रत जिसको अपने इलावा कोई एक आँख भी नहीं भाता। नफ़रत कहीं भी हो,किसी भी जगह हो,किसी भी मज़हब में हो,किसी भी सूरत में हो, नफ़रत सि़र्फ ख़ून बहा सकती है,नफ़रत सिर्फ़ गोली मरवा सकती है.. और कुछ नहीं दे सकती।

नहीं यक़ीन आता तो देखिए… चाहे सीमा के इस पार हो, चाहे उस पार हो, नफ़रत ने किया-क्या गुल नहीं खिलाये.. अफ़्ग़ानिस्तान में तालिबान ने गौतम बुद्ध की प्रतिमा को धमाके से उड़ा दिया..विश्व हिंदू परिषद ने यहां बाबरी मस्जिद गिरा दी.. सरहद के उस पार तालिबान ने अगर बादशाह ख़ान यूनिवर्सिटी पर हमला किया तो इस पार लोगों ने जामिआ,जेएनयू और एएमयू पर हमला कर दिया… उस तरफ़ अगर मलाला यूसुफ़ ज़इ पर हमला हुआ तो इधर आयशी घोष पर हमला हुआ.. क्या कोई किसी से एक भी क़दम पीछे है..नहीं। तो सोचिए अगर बुद्ध की प्रतिमा उड़ाने वाले दहश्तगर्द थे तो बाबरी मस्जिद गिराने वाले कौन हैं ?..अगर वो दहश्तगर्द हैं तो ये क्यों नहीं ?

सोचिए अगर पाकिस्तान में बादशाह ख़ान यूनिवर्सिटी और आर्मी स्कूल पर हमला करने वाले तालिबानी आतंकी थे तो जामिआ,जेएनयू ,एएमयू पर हमला करने वाले कौन हैं..? सोचिए अगर मलाला यूसुफ़ ज़ई पर हमला करने वाले टेरोरिस्ट थे तो आयशी घोष पर हमला करने वाले टेरोरिस्ट क्यों नहीं….?
हर तरफ़ नफ़रत के जमूरे फैले हुए हैं..अगर कहीं तालिबान है तो कहीं आरएसएस है..कहीं अलक़ायदा है तो कहीं बजरंग दल..कहीं जैश मुहम्मद है तो कहीं वीएचपी है.. कहीं कुछ है तो कहीं कुछ है..सबकी सब नफ़रत की दुकानें हैं..जो गोली,दंगा,फ़साद और खून के ब्योपारी हैं।

अगर एक तरफ़ तालिबान का सरबराह ऐमन अलज़वाहरी है तो दूसरी तरफ़ आरएसएस का सरबराह मोहन भागवत है..एक तरफ़ बग़्दादी है तो दूसरी नाथु राम गोडसे है.. एक तरफ़ मसऊद अज़हर है तो दूसरी और प्रवीण तोगड़िया है…क्या फ़र्क़ है…? ये एक दूसरे से कैसे अलग हैं…? सोचने की ज़रूरत है।

सोचिए,समझिए और समझाईए..क्योंकि यही सोचने समझने और समझाने का वक़्त है .. इसे हमसे ज़्यादा कौन समझता है..इसे हमसे ज़्यादा कौन जानता है..तालिबान और इस जैसे संगठनों ने दाढ़ी रखकर अपने सारे ग़लत काम किए..आज हमें दाढ़ी रखते हुए ख़ौफ़ आता है क्योंकि लोग हमें तालिबानी समझते हैं …. यही भगवा वस्त्र पहन कर यहाँ के लोग कर रहे हैं..कल तुम भी भगवा पहनते हुए डरोगे क्योंकि लोग भगवा को आतंकी वस्त्र समझने लगेंगे..एक दिन आएगा कि तुम जय श्री राम कहने को तरस जाओगे..जैसे हम नारा तकबीर कहने के लिए तरसते हैं , क्योंकि तालिबान और इस जैसे संगठनों ने नारा तकबीर लगा कर लोगों पर हमला किया..ऐसे ही जैसे आरएसएस और उससे जुड़े संगठन के लोग जय श्री राम कह कर किसी की भी लिंचिंग कर देते हैं।
नफ़रत की आईडियालॉजी के लोग किसी धरम और मज़हब के नहीं होते बल्कि अपने फायदे के लिए धर्म और मज़हब का इस्तेमाल करते हैं।

हम बताते हैं कि तालिबान और उस जैसे संगठनों ने हमारी आस्था और यक़ीनों को हाईजैक किया है तुम सोचो कि आरएसएस और उस जैसे संगठनों ने तुम्हारी आस्था और यक़ीनों को हाईजैक किया है कि नहीं ?..अगर नहीं तो कैसे नहीं ?..अगर हाँ तो सोचिए,समझिए और समझाइये.. यही वक़्त है..अगर अब भी नहीं समझे तो आने वाला वक़्त ख़ुद समझा देगा ऐसे ही जैसे एक प्रेमी और प्रेमिका को उस के दोस्त और सहेलियाँ समझाते हैं मगर समझ में नहीं आता..मगर दो-चार साल बाद उन्हें ख़ुद बख़ुद समझ में आ जाता है..अगर यही सब चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब तुम्हें भी कहना पड़ जायेगा कि My Name is Shankar but i am not a terrorist ऐसे ही जैसे हमें कहना पड़ा- My name is Khan but i am not a terrorist.

~ Saif Azhar ( ये लेखक की अपनी राय)