लखनऊ, यूपी

पिछले दशकों में मुसलिम आबादी के वोट से सत्ता पर काबिज़ होने वाली सरकारों ने मुसलमानों को इस्तेमाल तो लिया लेकिन कभी उन्हों ने भागीदारी और हिस्सेदारी की बात नहीं की। आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड पिछले दस वर्षों से मुसलमानों की सियासी भागीदारी की लड़ाई लड़ रहा है। आज भागीदारी की बात अगर देश भर में उठ रही है और राजनैतिक पार्टियाँ हमारी भागीदारी की बात करने पर मजबूर होती दिख रही हैं तो इस का श्रेय पिछले दस सालों का कठिन परिश्रम रहा है। यह बातें आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद मुहम्मद अशरफ किछोछवी ने वर्तमान राजनीति को लेकर मुसलमानों की स्थिति पर बात करने आये यूपी के कई ज़िलों से मुसलमानों के वफद को संबोधन करते हुए कहीं।

उन्हों ने कहा कि यह समय सियासी सूझ बूझ का है। मुसलमानों को सिर्फ भागीदारी और हिस्सेदारी की बात करनी चाहिए और किसी भी तरह कि छोटी बड़ी पार्टी के चक्कर में ना फंसते हुए जो मुसलमानों की भागीदारी को सुनिश्चित करे उस के बार में सोचना चाहिए।

उन्हों ने आगे कहा कि जिस तरह इस देश का संविधान सब को समान अधिकार देता है इसी तरह सत्ता की कुर्सी पर बैठने वाली हर राजनैतिक पार्टियों को हर समुदाय को समान अधिकार देने चाहिए। किसी को लड़ा कर और किसी को डरा कर सता हथियाने के बाद खुद उन्हीं को उन के अधिकारों से वंचित रखा जाना देश का सब से बड़ा राजनैतिक शोषण है।

मौलाना किछोछवी ने आगे कहा कि व्यक्ति, परिवार और समुदाय विशेष के इर्द गिर्द घूमता सत्ता के सुख को विराम मिलना चाहिए। हमें किसी दूसरे का हक़ नहीं चाहिए। जिस का जो हक़ है उसे मिलना चाहिए। सब का साथ सब का विकास बग़ैर समान अधिकार और भागीदारी के संभव नहीं है।