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जी आपका देश बिक रहा है मगर किस्तों में ,सार्वजानिक उपक्रम धीरे धीरे बेचे जा रहे हैं ,एयरपोर्ट,रेलवे स्टेशन पहले ही बिक चुके हैं अब ट्रेनों की बोली लगाएगी सरकार जिसमें क्षमता हो खरीदे यानी अब सस्ती यात्रा के दिन गये जनाब बहुत नुक़सान पहुंचा लिया आपने सरकार को यह कोई पुरानी सरकार नहीं है जो फैसला लेने में हिचकती हों यह ताकतवर सरकार है जिसके प्रधानमंत्री मोदी जी हैं जी वही नरेन्द्र मोदी जो हैं तो मुमकिन है।

यूंही देश के गृहमंत्री नहीं कहते कि एक इंच पीछे नहीं हटूंगा आखिर इसे ही तो मजबूत इरादा कहते हैं भले देश बर्बाद होता है हो जाय ,मगर जो सोच लिया करके मानेगे ,आखिर मजबूत सरकार ऐसी ही होती है कि विदेशी लोग चुटकी ले रहे हैं कि कश्मीर तो जाएंगे मगर आपकी रोक टोक के बिना ,देश ने मजबूत सरकार को जेएनयू में भी देखा जहां देश की राजधानी में स्थित इस संस्थान में नकाबपोश गुंडे घुस गए और छात्र छात्राओं को बुरी तरह पीटा ऐसी होती है सरकार।

एक बात बताऊं एक डबल इंजन की सरकार भी होती है ,आपको पता है यही सरकार उत्तरप्रदेश में हैं जिसने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं,डबल इंजन सरकार में पुलिस बहुत ताकतवर होती है ,लाठियां बरसाती है फिर गोली मार देती है ,पहले उसे छुपाती है फिर बताती है, इतना ही नहीं घरों में घुस जाती है, महिलाओं को पीटती है ,दुधमुंहे बच्चे को मां से जुदा कर देती है ,गरीब की मार देती है ,जनाब इतना ही नहीं लाश को घर ले जाने की इजाज़त नहीं देती।

हमें इससे क्या हम तो नहीं मारे गए न लेकिन सुनिए रोजगार तो आपके बच्चे को भी नहीं मिलेगा क्योंकि रेलवे की परीक्षा का अब क्या फायदा जब ट्रेन ही बिक जायेगी तो नौकरी कैसी? बीएसएनएल का भी यही हाल है अपने होनहार को कहिए कि पढ़ लिखकर एक कैनोपी खरीद ले आखिर में किसी मोबाइल कंपनी का सिम बेचने का मौका मिलेगा ही,आखिर क्या ज़रूरी है कि आपके बच्चे को सरकारी नौकरी दी जाय।

वैसे अब सिविल सर्विस की तैयारी भी बंद ही कीजिए क्योंकि अब आपकी जरूरत शायद नहीं है, मजबूत सरकार ने अब निजी क्षेत्र से लोगों की भर्ती शुरू कर दी है ,यानी आपको अब कुछ नहीं करना है बस शांति से घर में बैठे रहिए, ट्रेन बिक रही है अब सफर में कोई दिक्कत नहीं होने वाली, क्योंकि अब ट्रेन लेट नहीं होगी ,सबको सीट मिलेगी ,बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी,आखिर जब आपको सुविधा मिलेगी तो आप ज़्यादा पैसे भी देंगे इसमें कोई बुराई नहीं है ।महंगा चलेगा मगर खराब नहीं लेकिन जनाब एक सवाल और पूछूं अगर आप इजाज़त दें कि ज़्यादा पैसे देने के लिए आप पैसे लाएंगे कहां से,अगर आप अमीर हैं तो कोई बात नहीं है लेकिन यह सवाल गरीब का है भारत में बसने वाले मध्यमवर्ग का है।

खबरे तो ऐसी भी हैं कि जिला अस्पताल भी निजी हाथों में दिए जायेंगे ,यह भी सही है क्योंकि बड़ी बुरी हालत है निजी हाथों में जाने से सही इलाज तो मिलेगा अगर जेब में पैसे हैं तो ज़िंदा रहिए वरना जी कर करेंगे भी क्या?

वैसे किसी को कोई हक नहीं मजबूत सरकार पर किसी भी प्रकार का आरोप लगाने का,या उसकी मंशा पर शक करने का,कितने देशद्रोही हैं वह लोग जो सड़कों पर हैं देशभक्त सब कितनी शांति से देख रहे हैं सराह रहे हैं हर फैसले को समर्थन का ऐलान कर रहे हैं ,अब तो समर्थन में सड़कों पर भी आ रहे हैं।आखिर इन्हें रोजगार और स्वास्थ्य से क्या मतलब,इनसे रेल किराए की बढ़ोतरी से क्या लेना देना,देशहित से कोई समझौता नहीं करना चाहिए।

मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ

वैसे उत्तरप्रदेश सरकार यानी डबल इंजन वाली सरकार ने आदेश कर दिया है कि सरकारी वाहन खड़े कर टैक्सी विभागों में ली जाएं और सब उसी से चलें क्योंकि वाहनों पर ज़्यादा खर्च हो रहा है ,आप समझ रहे भी हों तो भी मत समझिए फिर भी बताऊं आपको दरअसल अब आप सरकारी ड्राइवर बनने का ख्वाब देखना बंद कर दीजिए जब वाहन ही सरकारी नहीं होगा तो चालक कैसे होगा। वैसे ही जब ट्रेन सरकारी नहीं होगी तो कर्मचारी कैसे?

आप समर्थन में कोई कसर मत छोड़िए आखिर आपने कहावत तो सुनी होगी कि पड़ोसी की बकरी मरनी चाहिए मेरी दीवार गिरती है तो गिर जाए हमें और आपको तब तक समर्थन करना होगा जब तक भारत का हर एक संसाधन नहीं बिक जाता ,आखिर निजी हाथों में जाने के बाद देश कितना सुंदर होगा ,कोई अव्यवस्था नहीं होगी सबकुछ सुगम होगा,शिक्षा,स्वास्थ्य,परिवहन ,खनन,पेट्रोलियम ,दूरसंचार सब 100% निजी क्षेत्र में चले जाएं इसका समर्थन करना है,देश की सभी यूनिवर्सिटी भी निजी क्षेत्र द्वारा ही संचालित हो तो टुकड़े टुकड़े गैंग भी नहीं पनपेगा।

आखिर आप इसके समर्थक तो होंगे ही तो बस इसके लिए कुछ नहीं करना है सिर्फ हर फैसले का समर्थन करना है अगर मिस कॉल के लिए कहा जाए तो करिए,सड़क पर बुलाया जाए तो समर्थन में उतारिए,कुछ सही गलत मत सोचिए बस समर्थन कीजिए इस भावना के साथ कि आपको फायदा हो रहा है कि नहीं मगर दूसरे को नुक़सान तो हो रहा है।

आपको वर्गलाने के लिए लोग आपको गिरती हुई जीडीपी के बारे में बताएंगे,सिकुड़ती अर्थव्यवस्था का ज़िक्र करेंगे ,बेरोजगारी की बात होगी ,महंगाई के बारे में सवाल करेंगे,आपको कुछ नहीं सुनना है यह आपका कर्तव्य है,और इतना ही नहीं साथ ही बेतुके तर्कों से उसका जवाब भी देना है अगर आप ऐसा करते हैं तो आप देशभक्त हैं वरना कोई आपको देशद्रोही कह सकता है लिहाज़ा अपने इस तमगे की रक्षा करना आपकी नैतिक ज़िम्मेदारी है।
वैसे अभी देश बिक रहा है,ट्रेन ले लो ट्रेन।