कोलकाता। लोकसभा चुनाव के दौरान से हिंसा की आग में जल रहे उत्तार चौबीस परगना जिले के भाटपाड़ा की स्थिति जहां नजूक है वही पुलिस द्वारा यहां ताबड़तोड़ अभियान को ्ंजाम दिया जा रहा है। खबर के लिखे जाने भाटपाड़ा में हिंसा जारी रहा। यहां लगातार हत्याओं के बाद यहां फायरिंग और बम दागे जा रहे हैं। शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आज वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मैदान में उतरे। सर्च अभियान चलाया गया और पुलिस तब दंग रह गई जब इलाके से पचास से ज्यादा बम बरामद किए गए। लेकिन पुलिस का दावा है कि आज इलाके के हालात शांत रहे। बैरकपुर के डीसी जोन एक के एक वरीय पुलिस अधिकारी अजय ठाकुर ने बताया कि इलाके में लगातार बमबाजी और हिंसा के चलते सर्च अभियान चलाया गया। इस दौरान भाटपाड़ा थाने के अंतर्गत आने वाले काकीनाड़े इलाके से पुलिस ने पचास बम बरामद किए हैं।

उन्होंने दावा करते हुए बताया कि इलाके की परिस्थितियां अभी सामान्य हैं। बीते गुरुवार को हुई ताजा हिंसा के दौरान पुलिस की गोलीबारी में यहां दो लोगों की मौत हो गई थी और अन्य चार लोग घायल हो गए थे। प्रशासन को प्रभावित इलाके में निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी थी। इस बीच, राज्य बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने भाटपारा में शांति बहाली में नाकाम रहने को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाया। उन्होंने बांकुड़ा के पत्रसायर में एक किशोर और दो अन्य लोगों के गोली लगने से घायल होने का जिक्र भी किया। इलाके में शनिवार को झड़प उस समय हुई, जब राज्य के मंत्री और वरिष्ठ पार्टी नेता शुभेंदु अधिकारी की रैली से लौट रहे तृणमूल कार्यकर्ताओं को देखते ही बीजेपी कार्यकर्ता ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने लगे। दिलीप घोष ने दावा किया, ‘टीएमसी या तो लड़ाई का सहारा ले रही है या दूसरों की हत्या कर रही है। पुलिस स्थानीय लोगों को परेशान करने में बदमाशों की मदद कर रही है। नतीजतन, वे भड़क रहे हैं और हिंसक हो रहे हैं। यही वजह है कि छोटी से छोटी घटना भी बेकाबू हो जाती है।’ उनके मुताबिक, जब पुलिस, आम आदमी और समूचा समाज असुरक्षित है, तब ऐसे में किसी के लिए भी सामान्य जीवन जीना दुश्वार हो जाएगा।

आपको बता दें की इस इलाके में स्थितियां लोकसभा चुनाव के दौरान ही गंभीर हो गई थीं जब चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक अर्जुन सिंह बीजेपी में शामिल हो गए थे। अर्जुन सिंह ने बैरकपुर लोकसभा सीट से पूर्व टीएमसी सांसद और रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को हराया है। तब से सिंह को तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष के बीज बोते देखा जा रहा है। चुनावों के बाद पिछले तीन हफ्तों में, तृणमूल कांग्रेस ने कम से कम छह नगर पालिकाओं उत्तर 24 परगना जिले से पांच और दार्जिलिंग जिले से एक पर पर नियंत्रण खो दिया।