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नई दिल्ली, 24 फरवरी 2020, (आरएनआई )। दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद विधानसभा का पहला सत्र आज से शुरू होगा और 26 फरवरी तक चलेगा। नए सत्र के लिए बीजेपी ने बदरपुर से विधायक रामवीर सिंह बिधूड़ी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना है। सत्र के पहले दिन सभी विधायकों को विधानसभा की शपथ दिलाई जाएगी। सत्र की कार्रवाई सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगी।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी से विजेंद्र गुप्ता, मोहन सिंह बिष्ट, रामवीर सिंह बिधूड़ी, ओमप्रकाश शर्मा, अभय वर्मा, जितेंद्र महाजन, अनिल वाजपेयी, अजय महावर ने जीत हासिल की। विधूड़ी ने बदरपुर सीट से चौथी बार जीत हासिल की थी। आपको बता दें कि पिछली बार भाजपा को मात्र तीन सीटें मिली थीं। विजेंद्र गुप्ता, ओपी शर्मा और जगदीश प्रधान विधानसभा पहुंचने में सफल रहे थे। गुप्ता को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। इस बार भी वह विधानसभा पहुंचने में सफल रहे हैं।

बिधूड़ी अनुभवी विधायक हैं। बिधूड़ी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। बिधूड़ी कई पार्टियों में रह चुके हैं। 1993 में वह जनता दल के टिकट पर विधानसभा पहुंचते थे। जनता दल विधायक दल के नेता भी चुने गुए थे। उसके बाद वह वर्ष 2003 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का दामन थाम लिया था। उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का भी पुरस्कार मिला था। वर्ष 2012 में भाजपा में शामिल हुए। 2013 में वह भाजपा की टिकट पर ही विधानसभा पहुंचे। 2015 में चुनाव हारने के बाद इस बार फिर से वह विधायक चुने गए हैं। वो बड़े गुर्जर नेता रहे हैं।

विधानसभा सचिवालय के मुताबिक सरकार गठन के बाद सातवीं विधानसभा का यह पहला सत्र होगा। पहले दिन विधायकों को प्रोटेम अध्यक्ष शोएब इकबाल शपथ दिलाएंगे। उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा। सूत्रों की माने तो केजरीवाल सरकार रामनिवास गोयल को दोबारा विधानसभा अध्यक्ष चुनेगी। अभी तक सरकार के पास जिन नामों की सिफारिश की गई है, उसमें रामनिवास गोयल का नाम सबसे आगे है।

सत्र के दूसरे दिन यानि 25 फरवरी को उपराज्यपाल अनिल बैजल का विधानसभा में अभिभाषण होगा। वह दिल्ली सरकार के अगले पांच साल के कामकाज की रूपरेखा, उसकी योजनाओं को लेकर सरकार की बात रखेंगे। सत्र के आखिरी दिन एलजी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव आएगा। इस बार विधानसभा में नजारा थोड़ा बदला नजर आएगा। इस बार विपक्ष बड़ा नजर आएगा। छठी विधानसभा के चार विधायकों की तुलना में इस बार विपक्ष की आठ सीटें होंगी। वहीं 62 विधायक सत्तापक्ष में नजर आएंगे।