15 साल एक लंबा वक्त होता है किसी सरकार को ठोस काम करने का। बेशक नीतीश के इस कार्यकाल में सड़कें बनीं और बिजली पहुँची लेकिन इसी काम के आस पास नीतीश ने 15 साल काट लिए। कम से कम उन्हें स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। मशीनें ख़रीद कर अस्पताल में पड़ी हैं मगर डॉक्टर नहीं हैं। कहीं इमारत 13 साल से बनती रही है।
सोचिए बिहार के 18 ज़िलों के सरकारी अस्पताल में ICU नहीं है। यह जवाब सरकार ने ही 2017 में विधानसभा में दिया था। फिर स्वास्थ्य मंत्री नाम का प्राणी काम क्या करता होगा? नालंदा तो नीतीश कुमार का ज़िला है। यहाँ के एक अस्पताल में करोड़ों रुपये की मशीनें और बिस्तर धूल खा रहे हैं।
काश कालेजों और अस्पतालों में काम हुआ होता तो जनता की तकलीफ़ कम हुई होती। आज नीतीश और बीजेपी को 15 साल पुराने शासन काल की बात नहीं करनी पड़ता। दरअसल सड़क और बिजली की व्यवस्था करके भी नीतीश ने बिहार को 30 साल पीछे पहुँचा दिया है।
नया सवेरा की टाम ने भी कई सरकारी अस्पतालों का दौरा किया, जहाँ पर उसकी हालात जर्जर नज़र आई| अस्पताल में डॉक्टर की जगह ताला लटकता मिला, मौक़े पर मौजूद लोगों ने बताया की हफ़्ते में एक दो दिन खुलता है| वो भी घंटे दो घंटे के लिए| किसी को इमरजेंसी पड़ती है तो उसे 40 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है|