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नई दिल्ली, 20 सितंबर 2019, (आरएनआई)। नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद पिछले 18 दिनों में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) प्राप्त करने वाले वाहनों की संख्या में नौ गुना तक की वृद्धि हुई है। बिहार और उत्तराखंड में अगस्त की तुलना में जारी किए गए पीयूसी की संख्या में अधिकतम वृद्धि देखी गई है।

यहां हम 9 राज्यों के पिछले तीन महीनें के आंकडें बता रहे हैं जहां प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र बनाने में वृद्धि देखी गई।

बिहार

जुलाई 2019: 16,276 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 31,707 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 2,87,303 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

छतीसगढ़

जुलाई 2019: 38,138 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 37961 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 84871 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

गुजरात

जुलाई 2019:63220 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 94094 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 2,96,409 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

हिमाचल प्रदेश:

जुलाई 2019: 93 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 890 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 19787 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

महाराष्ट्र

जुलाई 2019: 33,841 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 36,777 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 59,437 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

तमिलनाडू

जुलाई 2019: 1,59,032 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 1,49,042 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 1,05,111 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

उत्तराखंड

जुलाई 2019: 7,178 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 23,417 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 2,25,848 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

उत्तर प्रदेश

जुलाई 2019: 2,12,744 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 3,03,084 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 11,25,012 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

वेस्ट बंगाल

जुलाई 2019: 31,732 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

अगस्त 2019: 48,390 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

सितम्बर 2019: 63,797 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

प्रदूषण की जांच के लिए एक गैस एनालाइजर को एक ऐसे कंप्यूटर से जोड़ा जाता है जिसमें कैमरा और प्रिंटर भी जुड़ा हो। यह गैस एनालाइजर गाड़ी से निकलने वाले प्रदूषण के आंकड़ों की जांच करता है और इसे कंप्यूटर को भेजता है। जबकि कैमरा गाड़ी के लाइसेंस प्लेट की फोटो लेता है। अगर गाड़ी से निश्चित दायरे के अंदर प्रदूषण निकल रहा हो, तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।

परिवहन विभाग के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन 217.7 टन कार्बन मोनोऑक्साइड, 84.1 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड और 66.7 टन हाइड्रोकार्बन्स का उत्सर्जन सिर्फ गाड़ियों से होता है। जानकारी के लिए बता दें कि बिना पॉल्युशन सर्टिफिकेट पर 10,000 रुपये का जुर्माना है।