कोलकाता। बिहार चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद अब कांग्रेस के लिए पश्चिम बंगाल में मुश्किल हो सकती है। बंगाल में कांग्रेस के पास न तो कोई बड़ा चेहरा है और न ही जनाधार। कांग्रेस यहां वजूद बनाए रखने की चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में पार्टी को वहां एक मजबूत गठबंधन की जरूरत है। फिलहाल लेफ्ट ने कांग्रेस पर भरोसा जरूर दिखाया है लेकिन फिर भी जिस हिसाब से बीजेपी इस समय राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बनी हुई है, उससे कांग्रेस-सीपीएम का गठबंधन ममता की टीएमसी का मुकाबला करने के लिए फिलहाल कमजोर ही नजर आ रहा है।दरअसल बिहार चुनाव में अब अपने ही कांग्रेस पर सवाल उठाने लगे हैं।

महागठबंधन की हार के पीछे कांग्रेस पर दोष मढ़ा जा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता शिवानंद तिवारी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव जब अपने चरम पर था तो राहुल गांधी शिमला में बहन प्रियंका के साथ उनके घर पर पिकनिक मना रहे थे। शिवानंद तिवारी का यह बयान काफी कुछ कहता है।न सिर्फ आरजेडी बल्कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी पार्टी नेतृत्व पर जमकर भड़ास निकाली है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि पार्टी ने शायद हर चुनाव में पराजय को ही अपनी नियती मान ली है।

कांग्रेस बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाली महागठबंधन का हिस्सा थी। कांग्रेस पार्टी को 70 सीट दी गई थीं लेकिन पार्टी सिर्फ 19 सीटें ही जीत पाई जबकि महागठबंधन एनडीए से मात्र 15 सीटें ही कम जीत पाया। महागठबंधन की हार के बाद अब कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ना भी शुरू हो गया है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में अब कांग्रेस को भाव मिलना बेहद मुश्किल है जहां बीजेपी ने उसे तेजी से राजनीतिक हाशिये पर पहुंचा दिया है।

पिछले विधासभा चुनाव में कांग्रेस लेफ्ट गठबंधन में पार्टी को 44 सीट मिली थीं लेकिन अधिक सीटों पर लड़ने के बावजूद लेफ्ट को सिर्फ 26 सीटें मिली जिससे पार्टी के अंदर कांग्रेस के साथ समझौते को लेकर विरोध हुआ था। नतीजा, 2019 लोकसभा चुनाव दोनों पार्टियों ने अलग-अलग लड़ा। अब राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दल फिर एक साथ आए हैं।