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नई दिल्ली, 24 सितंबर 2019, (आरएनआई)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) से इतर आतंकवाद पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चीन को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि विश्व में कहीं भी कोई आतंकी हमला हो, उसे सिर्फ और सिर्फ आतंकी हमले के तौर पर लेना चाहिए, न कि अच्छे या बुरे आतंकवाद के तौर पर लेना चाहिए।

आतंकवाद पर आयोजित कार्यक्रम लीडर्स डायलॉग ऑन स्ट्रेटेजिक रिस्पांसेस टू टेरेरिस्ट ऐंड वॉयलेंट एक्ट्रिमिस्ट नरेटिव्ज में पीएम मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध सूची और टेरर फंडिंग रोकने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की तरफ से लगने वाले प्रतिबंधों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एफएटीएफ जैसी प्रणालियों का राजनीतिकरण नहीं होने देना चाहिए, बल्कि इन प्रणालियों को ठीक से लागू करने की जरूरत है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बहुपक्षीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को संस्थागत रूप देने का आह्वान किया और जोर देकर कहा कि इस दिशा में भारत मित्र देशों के क्षमता निर्माण और पहले से जारी सहयोग को बढ़ाने की खातिर काम करेगा।

इस बैठक के बाद विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) ए गितेश शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि आतंकवादियों को पैसा और हथियार हासिल नहीं होने दिए जाएं। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय और क्षेत्रीय ढांचे के जरिए खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया और जारी सहयोग में गुणात्मक सुधार की जरूरत है।

भारत के अनुभव को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता और समावेशी विकास, आतंकवाद, कट्टरपंथ और अतिवाद को बढ़ावा देने वाली विचारधाराओं के खिलाफ बेहद अहम हथियार हैं।

मोदी ने कहा कि जिस तरह दुनिया ने जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के खिलाफ एकजुटता दिखाई है उसी तरह आतंकवाद के खिलाफ भी वैश्विक एकता और इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना चाहिए। बैठक में आतंकवाद तथा हिंसक कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री को खत्म करने के लिए भी चर्चा हुई।