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भोपाल, 10 नवंबर 2019, (आरएनआई )। 70 साल की लंबी कानूनी लड़ाई पर उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को फैसला सुना दिया। अदालत ने विवादित भूमि को रामलला विराजमान को दी है। वहीं मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया है। अदालत ने मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार को एक ट्रस्ट का गठन करने के लिए कहा है। यह फैसला टाइटल सूट यानी जमीन के मालिकाना हक को लेकर था।

अदालत के इस फैसले का विवादित ढांचे को गिराए जाने वाले मामले से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार ने शनिवार को कहा कि विवादित ढांचे को ढहाना गैरकानूनी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किए हैं। जिसमें उन्होंने पूछा है कि ढांचा ढहाने के दोषियों को क्या सजा मिलेगी।

दिग्विजय सिंह ने लिखा, माननीय उच्चतम न्यायालय ने राम जन्म भूमि फैसले में बाबरी मस्जिद को तोड़ने के कृत्य को गैर कानूनी अपराध माना है। क्या दोषियों को सजा मिल पाएगी? देखते हैं। 27 साल हो गए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी के हित में नहीं है विध्वंस और हिंसा का रास्ता। उन्होंने लिखा, राम जन्म भूमि के निर्णय का सभी ने सम्मान किया हम आभारी हैं। कांग्रेस ने हमेशा से यही कहा था हर विवाद का हल संविधान द्वारा स्थापित कानून व नियमों के दायरे में ही खोजना चाहिए। विध्वंस और हिंसा का रास्ता किसी के हित में नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मस्जिद में मूर्ति रखना और ढांचा ढहाना गैरकानूनी था। पीठ ने कहा, साक्ष्यों के अनुसार, मस्जिद में मुस्लिम नमाज पढ़ते थे। 22-23 दिसंबर 1949 को गुंबद के नीचे मूर्ति रखी गई। यह अपवित्र काम था। 1992 में ढांचा ढहना कानून का उल्लंघन था। हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जो गलत हुआ, उसे सुधार सकते हैं। मस्जिद के लिए जमीन देना जरूरी है, क्योंकि मुस्लिमों को गलत तरीके से बेदखल किया था। या तो, केंद्र सरकार अधिगृहीत जमीन से इतर या फिर राज्य सरकार अयोध्या में वक्फ बोर्ड को जमीन दें।