बेंगलूरूः तंबाकू से दूरी बनाने और दूसरों को भी इस जानलेवा लत से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के कार्यक्रम अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने “जीवन का संकल्प-तंबाकू मुक्त युवा” अभियान के तहत शपथ ली। कर्नाटक के तकनीकी शिक्षा निदेशालय ने 4 मार्च, 2020 को एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों और स्वयंसेवकों के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया, जबकि बेंगलूरू की युनिवर्सिटी ऑफ एग्रिकल्चरल साइंसेज ने 5 मार्च, 2020 को इस कार्यशाला का आयोजन किया।

एनएसएस का कर्नाटक क्षेत्रीय निदेशालय और कर्नाटक सरकार के युवा सशक्तिकरण एवं खेल विभाग का राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ, नारायण हेल्थ एवं संबंध हेल्थ फाउंडेशन के साथ मिलकर पूरे कर्नाटक में यह अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के तहत रैलियां, नुक्कड़ नाटक, शपथ ग्रहण, पोस्टर प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता आदि जैसी कई गतिविधियां की जा रही हैं जिनमें युवा हिस्सा ले रहे हैं।

नारायण ह्रदयालय से और वायस ऑफ टोबैको विक्टिम्स की संरक्षक डाक्टर मंजुला बी. ने कहा, “जिन दिक्कतों और मानसिक त्रासदी से हमारे मरीज और उनके परिवार के लोग गुजरते हैं, मैं उसकी गवाह हूं। 90 प्रतिशत मुंह के कैंसर के लिए अकेले तंबाकू जिम्मेदार है। डाक्टर के तौर पर हम मरीजों का इलाज कर रहे हैं और उन्हें सलाह दे रहे हैं, लेकिन यदि इसे शुरू में ही रोक दिया जाए तो इससे कई किशोर तंबाकू उत्पादों की बुरी लत में फंसने से बचेंगे। इलाज के मुकाबले रोकथाम से कहीं बेहतर नतीजे सामने आएंगे। मुझे यह देखकर खुशी है कि तंबाकू रोधी गतिविधियों में युवा नेतृत्व कर रहे हैं।”

“जीवन के लिए संकल्प-तंबाकू मुक्त युवा” अभियान भारत के राष्ट्रपति माननीय श्री राम नाथ कोविंद से प्रेरित है और केंद्रीय युवा एवं खेल मामलों के मंत्रालय ने इसमें अपना सहयोग दिया है। यह अभियान युवाओं को तंबाकू के इस्तेमाल से दूर रखने और अन्य लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु रोकथाम की रणनीति पर केंद्रित है। वर्तमान में यह अभियान असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश और दिल्ली में चलाया जा रहा है।

एनएसएस के एक अधिकारी के मुताबिक, इन कार्यशालाओं में 100 एनएसएस इकाइयों से करीब 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थी तंबाकू रोधी पोस्टरों के साथ इस कार्यशाला में आते हैं। इस दौरान, सर्वोत्तम पोस्टरों को पुरस्कृत भी किया गया।

एनएसएस की ये कार्यशालाएं इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण थीं क्योंकि कर्नाटक में हर तीन में से एक पुरुष और हर 10 में से एक महिला तंबाकू का सेवन करती है। उल्लेखनीय है कि तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से इस राज्य में हर दिन 140 लोग मरते हैं और प्रतिदिन 239 से अधिक बच्चे तंबाकू की लत का शिकार होते हैं। तंबाकू के साथ सुपाड़ी, बीड़ी और गुटका का सबसे अधिक सेवन कर्नाटक में देखने को मिलता है। आंकड़ों के मुताबिक, 23.9 प्रतिशत वयस्क आबादी इस राज्य में सेकेंड हैंड स्मोक से प्रभावित होती है।

कर्नाटक के तकनीकी शिक्षा निदेशालय में एनएसएस के कार्यक्रम संयोजक और इस कार्यशाला में सम्मानित डाक्टर गुरुप्रसाद एम. हुगर ने कहा, “तंबाकू के खतरे से हमारी युवा पीढ़ी की रक्षा करने की यह एक बड़ी पहल है। युवाओं ने तंबाकू रोधी गतिविधियों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और इन प्रयासों से लोगों के सामाजिक व्यवहार में एक सकारात्मक बदलाव आएगा। विद्यार्थियों को तंबाकू और लत डालने वाली अन्य चीजों से तौबा करने में गर्व करना चाहिए।”