रिपोर्ट- रागिब राही

केंद्र सरकार ने 2016 में श्यामा प्रसाद रूर्बन मिशन योजना की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य शहर में रहने वाले लोगों की तरह शहर से सटे ग्रामीण इलाके के लोगों को भी सुविधा मिले. गुमला के दो पंचायत करौंदी और तेलगांव को भी 2017 में इस योजना से जोड़ा गया. लेकिन अभी तक धरातल पर कुछ नजर नहीं आ रहा है.

करौंदी और तेलगांव पंचायत को योजना से जोड़ तो दिया गया. लेकिन अभी तक कोई लाभ गांव के लोगों को नहीं मिला है. आज भी गांव में गंदगी फैली हुई है. न सड़क बनी है और न ही नालियां. यहां तक कि करौंदी गांव में आवास योजना के तहत किसी को प्रधानमंत्री आवास भी नहीं मिला है.

जबकि सरकार ने वर्ष 2017 के जून माह में ही करौंदी और तेलगांव पंचायत को श्यामा प्रसाद रूर्बन मिशन के तहत चयन किया था. चयन के लगभग अब 2 वर्ष होने को हैं, आज भी धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है. जो भी काम हुए हैं वह सिर्फ कागजों में हुए हैं.

जिला प्रशासन के अधिकारी न जाने इन 2 वर्षों में कितनी बार गांव के विकास का खाका तैयार करने के लिए बैठक कर चुके हैं. लेकिन उन बैठकों का आज तक कोई नतीजा नहीं निकला है. जबकि जिला प्रशासन के द्वारा इन दोनों पंचायतों में 28 योजनाओं को संचालित करने के लिए पिछले लगभग 2 वर्षों से डीपीआर बनाकर उसको अप्रूव कराने की कोशिश जारी है. सरकार को नाबार्ड, विकास भारती बिशुनपुर एवं ग्राम प्रौद्योगिकी विकास संस्थान की ओर से डीपीआर बनाकर सौंपा गया है. करोड़ों रुपए की लागत से होने वाली विकास योजनाएं सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गई है.