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नई दिल्ली, 12 जनवरी 2020, (आरएनआई )। कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने रविवार को प्रेस कांफ्रेस करके पांच जनवरी को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हुई हिंसा के लिए कुलपति जगदीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस नेता सुष्मिता देव का कहना है कि कुलपति को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए।

केवल इतना ही नहीं कांग्रेस का कहना है कि कुलपति और हिंसा में शामिल शिक्षकों पर मामला दर्ज किया जाना चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि जेएनयू में बढ़ी हुई फीस को वापस लिया जाए और कुलपति की नियुक्ति के बाद हुई नियुक्ति को जांचा जाए। पार्टी का आरोप है कि जेएनयू हिंसा सुनियोजित और आपराधिक षड़यंत्र के तहत रची गई थी। जिसमें कुलपति शामिल हैं।

सुष्मिता ने कहा कि भीड़ वार्डन तपन बिहारी के घर से निकली थी और यह हमला प्रायोजित था। कांग्रेस का कहना है कि प्रेस कांफ्रेस में दिल्ली पुलिस ने वामपंथी संगठनों का नाम लिया था लेकिन वह एबीवीपी का नाम लेने से क्यों डर रहे थे। कांग्रेस नेता का कहना है कि जेएनयू में आरएसएस की विचारधारा से प्रभावित लोगों की नियुक्ति की गई है।

सहप्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) को प्राध्यापक बनाया गया। दो जनवरी को छात्र संगठनों ने कुलपति को पत्र लिखा था कि पंजीकरण की फीस बढ़ाकर ली जा रही है ऐसा न किया जाए। छात्रों की इस चिट्ठी का कुलपति ने कोई जवाब नहीं दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि जेएनयू हिंसा मामले में तीन एफआईआर दर्ज हुई हैं।

एक एफआईआर में सिक्योरिटी कंपनी का कहना है कि लोग नकाब लगाकर आए थे और वह सर्वर रूम में तोड़फोड़ करके गए थे। इसे लेकर कांग्रेस का कहना है कि जब उनके मुंह पर नकाब था को दिल्ली पुलिस ने कैसे उनकी पहचान करके मामला दर्ज किया। सुष्मिता ने पूछा कि प्राध्यापक सुचेता सेन के सिर पर वार किया गया। उन्हें 16 टांके लगे हैं लेकिन आईपीसी की धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत मामला क्यों नहीं दर्ज किया गया?