कोलकाता। आखिर कर सातवें दिन ही सही हड़ताल कर रहें जूनियर डाक्टरों ने अपनी हड़ताल आज शाम से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ एक बैठक के बाद वापस ले ली। बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हमने पर्याप्त कदम उठाए हैं, एनआरएस अस्पताल में हुई घटना में कथित तौर पर लिप्त पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है और हर सम्भावित कदम के लिये हम तैयार है। राज्य सचिवालय नवान्न में आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों के साथ बैठक मेंममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ने किसी भी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है। हड़ताली डाक्टरों के शर्त के मुताबिक राज्य के स्वास्थ्य सचिव, राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और राज्य के अधिकारी, 31 जूनियर डॉक्टरों के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक की।

शर्त के अनुसार दो क्षेत्रीय न्यूज चैनलों यानी मीडिया की उपस्थिति में राज्य सचिवालय में ममता बनर्जी और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुई बैठक को कवर करने की अनुमति दी गयी थी। राज्य सचिवालय में बैठक में जूनियर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उन्हें हो रही दिक्कतों से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अवगत कराया। ऐसे में हड़ताली डॉक्टरों से मिलीं ममता बनर्जी, नोडल ऑफिसर तैनात करने का निर्देश दिया। इधर मुख्यमंत्री के साथ बैठक में जूनियर डॉक्टरों के ज्वाइंट फोरम ने कहा कि हमे काम करते हुए हमें डर लगता है, एनआरएस के डॉक्टरों से मारपीट करने वालों को ऐसी सजा दी जाए जो दूसरों के लिए उदाहरण हो । नाराज डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने पहुंचीं।

डॉक्टरों और मुख्यमंत्री के बीच सचिवालय में बैठक हुई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के दो-दो प्रतिनिधियों से मिलीं। ममता बनर्जी ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अनुज शर्मा को नाबाना में डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान हर अस्पताल में एक नोडल पुलिस अधिकारी तैनात करने का निर्देश दिया।ममता बनर्जी ने सरकारी अस्पतालों में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ स्थापित करने के लिए डॉक्टरों के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। बता दें कि 10 जून को नील रत्न सरकार मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक 75 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने मौके पर मौजूद डॉक्टरों को गालियां दीं। इस पर डॉक्टरों ने परिजनों के माफी न मांगने तक प्रमाणपत्र नहीं देने की बात कही। इस मामले में फिर हिंसा भड़क गई, कुछ देर बाद हथियारों के साथ भीड़ ने हमला कर दिया। इसमें दो जूनियर डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हुए जबकि कई और को भी चोटें आईं। इस पूरे मामले पर ममता बनर्जी ने हड़ताल वाले डॉक्टरों की निंदा की तो मामला तूल पकड़ता गया।

आईएमए की हड़ताल से पूरे देश के साथ-साथ दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गहरा असर पड़ा है। एम्स के साथ ही राजधानी के सभी प्रमुख अस्पतालों और अन्य संस्थाओं के हड़ताल में शामिल होने के कारण दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के आईएमए के साथ आ जाने से संगठन के लगभग 18 हजार डाक्टरों ने भी काम करने से इनकार कर दिया है। इससे स्थिति गंभीर हो गई है। इस हड़ताल से इमरजेंसी सेवाओं को बाहर रखा गया है। दिल्ली सरकार की मोहल्ला क्लिनिक भी हड़ताल से बाहर हैं जिसके कारण थोड़ी राहत देखी जा रही है।इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने देशभर में 24 घंटे के लिए गैर-आवश्यक चिकित्सा सेवाओं को वापस लेने का आह्वान किया था जिसमें ओपीडी सेवा शामिल है।

सुबह छह बजे से देशभर की ओपीडी सेवा रद्द रहेंगी। यह फैसला कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर हुए हमले के प्रति समर्थन दिखाने के लिए लिया गया है। आपातकालीन और आईसीयू सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। आईएमए ने अस्पतालों में होने वाली हिंसा को रोकने के लिए एक देशव्यापी कानून बनाए जाने की मांग की है जिसमें न्यूनतम सात साल की सजा का प्रावधान हो, अस्पतालों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए और पर्याप्त सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी हो।

बिहार में सोमवार को डॉक्टरों की हड़ताल से चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो गयीं. राज्य में पिछले कुछ दिनों में भीषण गर्मी और लू तथा दिमागी बुखार से 100 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है.हिमाचल प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों ने सोमवार को ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधकर पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन कर रहे सहयोगी डॉक्टरों के प्रति एकजुटता दिखायी.जानकारी हो कि उच्चतम न्यायालय मंगलवार को देश भर के सरकारी डॉक्टरों की सुरक्षा और सलामती की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।