अमेठी यूपी नया सवेरा

तुरंत घटना स्थल पर पहुँचने का दावा करने वाली एम्बुलेंस सर्विस के सरे दावे उस वक्त खोखले और झूठे साबित हुए जब एक युवा एक्सीडेंट के बाद घंटों सड़क पर तड़पता रहा और एम्बुलेंस कई कॉल करने के बाद भी नहीं पहुंची। अमेठी जिला के सिंहपुर ब्लाक में ग्राम सातन पुरवा के बहार शुक्लापुर नहर के पुल पर कल शाम लगभग 4:30 अखिलेश रावत पुत्र अजीत रावत निवासी भवानी पुर इन्हौना का अपनी गाड़ी से गिर कर एक्सीडेंट हो गया जिस में वो बुरी तरह से घायल हो गए। सर और पैर में काफी गहरी चोटें दिख रही थीं। स्थानीय लोगों ने तुरंत 108 पर कॉल कर के एम्बुलेंस की आवश्यकता बताई लेकिन 1 घंटे का समय बीत जाने के बाद भी मौके पर एम्बुलेंस नहीं पहुंची।

घटना स्थल पर हमेशा देर से पहुँचने के लिए मशहूर पुलिस ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और बिना किसी विलम्ब के वह मौक़ा पर पहुंचे। मौके से लगभग आठ किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत खरावां में ज़मीनी विवाद को सुलझा रहे हल्का के सब इंस्पेक्टर उपेन्द्र प्रताप सिंह सुचना मिलते ही तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे वहीँ लगभग 10 किलोमीटर दूर व्यस्त 112 पुलिस की गाड़ी भी सुचना मिलते ही घायल व्यक्ति के पास पहुँच गई लेकिन एम्बुलेंस एक घंटे के बाद भी नहीं पहुंची।

हल्का निरीक्षक उपेन्द्र प्रताप सिंह को भी लगभग 40 मिनट तक एम्बुलेंस के लिए सर्विस के अलग अलग लोगों से बात करनी पड़ी लेकिन एम्बुलेंस नहीं पहुंची। अंततः उन्हें यह बताया गया कि घायल व्यक्ति तक पहुंचना पुलिस का काम है एम्बुलेंस का नहीं। इस तरह के ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये और बेतुके बयान के अलावा ला परवाही या तो आम आदमी को प्रताड़ित करते हैं या फिर उन की जान ले लेते हैं। सवाल यह भी है कि अगर पुलिस मौके पर पहुँच तुरंत ही अपनी गाड़ी से घायल व्यक्ति को अस्पताल न पहुंचती और कोई अनहोनी हो जाती तो क्या एम्बुलेंस सेवा इस की ज़िम्मेदारी लेती। क्या सरकार इस की ज़िम्मेदारी लेने को तैयार है?

जब एक पुलिस वाले आधे घंटे तक लाइन में रख कर बिजी रखा गया और एम्बुलेंस नहीं भेजी गई बल्कि 10 से ज्यादा बार सिर्फ नाम पता नोट कराया गया तो आमा आदमी के साथ क्या कुछ होता होगा।

मौके पर पहुंचे चोटिल युवा के घर वालों ने पुलिस का आभार व्यक्त किया कि समय पर पहुँच कर उचित सहायता से एक युवा को किसी और बड़ी मुसीबत से बचा लिया।