यह तो सभी जानते हैं कि पश्चिम एशिया का पिछले 70 सालों का इतिहास अशांति के दौर से गुजर रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और कई पश्चिमी देशो द्वारा यहूदीयो को मुस्लिम देशों के बीच बसाना, जिसने वहीं से विवाद को जन्म देना शुरू कर दिया था। कुल मिलाकर कहें तो इजरायल और मुस्लिम देशों के बीच तनाव और दुश्मनी के आलावा और कुछ नहीं बन सका। और तो और इनके बीच कई युद्ध भी हो चुके हैं, इजरायल ने सभी युद्धो को जीतने के साथ साथ पड़ोसी देशों की भूमि पर कब्जा भी कर लिया। जिसमें गोलान हाइट भी है।

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोलान हाइट को इजरायल का बताया और कहा कि यह इजरायल का संप्रभु क्षेत्र जिसे मान्यता दी। इसके तुरंत बाद मुस्लिम देश जैसे सीरिया, सऊदी अरब, तुर्की, इराक, और ईरान के साथ रूस ने इस मान्यता की कड़ी निन्दा की। इन देशों ने कहा कि इससे इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को धक्का लगेगा। इन देशों के विरोध के बावजूद अमेरिका और इजरायल के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है बल्कि वे जश्र मना रहे हैं।

बात 1967 की है जब गोलान हाइट सीरिया का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन 1967 में इजरायल ने 120 घंटे की लड़ाई में सीरिया को हरा दिया और जीत के बाद गोलान हाइट पर कब्जा कर लिया था। तब से लेकर अब तक यह क्षेत्र अशांति का दंश झेल रहा है। इस क्षेत्र में सीरिया की करीब डेढ़ लाख आबादी रहती थी, जिन्हें बाद में विस्थापित होना पड़ा था।जब इजरायल को इस गोलान हाइट का सैन्य महत्व लगा तब 1981 में इजरायल ने गोलान हाइट पर कानून पारित किया जिसका मतलब था कि यह भूमि पूरी तरह से इजरायल की है। संयुक्त राष्ट्र ने इस कानून की निन्दा की और इसे सीरिया की भूमि बताया, लेकिन इजरायल ने एक नहीं सुनी।

आज इजरायल इस क्षेत्र में लगातार यहूदी बस्ती बसाता जा रहा है, इसी कदम के चलते पश्चिम एशिया में अशांति और अस्थिरता का माहौल बनता जा रहा है।

येरूशलम पश्चिम एशिया में पहले से ही अशांति और विवाद का प्रमुख केन्द्र रहा है। क्योंकि यह क्षेत्र यहूदी, ईसाई और मुस्लिम तीनों धर्मों का पवित्र स्थल रहा है। लेकिन कब्जा यहां भी इजरायल का ही है जिसे पिछले साल अमेरिका ने येरूशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी। अमेरिका के इस निर्णय ने पश्चिम एशिया की शांति को हटाने या वहां आग में घी डालने का काम किया था। मुस्लिमों की तीसरी सबसे पवित्र मस्जिद अल अक्सा मस्जिद वो भी इजरायल के क्षेत्र में है। इस मस्जिद में इजरायल फिलीस्तीनियों के आने पर रोक लगा रहा है इससे वहां टकराव बढ़ता जा रहा है।

क्यों दी मान्यता
आपको बताते चलें कि इजरायल में अगले हफ्ते चुनाव होने हैं। गोलान हाइट के मुद्दे को चुनाव में लाने की कोशिश है। वर्तमान इजरायली राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हुए हैं। नेतन्याहू की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बहुत बनती है। कूल मिलाकर कहें तो कि बेंजामिन नेतन्याहू को दुबारा सत्ता में लाए जाने के उद्देश्य से यह सब किया जा रहा है, जो कि यह एक तरीके से गैर जिम्मेदाराना हरकत है । इससे अमेरिका के इस फैसले से पश्चिम एशिया में अशांति और अस्थिरता के अलावा और कुछ नहीं देगा और इन देशों के बीच टकरावों को बढ़ावा देगा।