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घबराईए मत मैंने कोई ऐसी बात नहीं कह दी है जो आपकी समझ में नहीं आती हो,यह बिल्कुल सच और बहुत सीधी बात है कि आतंक का एक ख़ास धर्म होता है, उसका एक ख़ास चेहरा होता है ,एक ख़ास पहचान होती है ,जो उसके कपड़ों से झलकती है और जिसे पहचान लेने की बात शायद प्रधानमंत्री भी कहते हैं?
आज आपने देखा होगा एक बेचारा बच्चा जामिया के छात्रों पर खेल खेल में गोली चला देता है ,अब उसे आतंकवादी नहीं कह सकते, आखिर युवा है खून ने उबाल मारा होगा तो गोली चला दी ,अब इसमें कौन सा पहाड़ टूट गया जिसपर उसे आतंकी कहा जाये आपही बता दीजिए यह क्या उसके साथ अन्नयाय नहीं होगा ?

अब कोई इस बेचारे ने शरजील जैसा गुनाह तो किया नहीं है ,जो इसे आतंकी कहा जाये ,अब कोई इसने देश का चक्का जाम करने की बात करते हुए यह तो नहीं कहा है कि देश के एक हिस्से को देश से काट दिया जाये , हां अगर इसने सड़क पर बैठे छात्रों को ललकार दिया तो क्या गुनाह हो गया? खुद सोचिए इस बेचारे ने देशहित में गोली चलाई है किसी कन्हैया कुमार जैसे आजादी के नारे नहीं लगाए जो इसे टुकड़े टुकड़े गैंग का सदस्य कहा जाये।

अब क्या राम की धरती पर किसी रामभक्त को आप आतंकी कह देंगे ?क्या अंधेर नहीं होगा यह ?आप बोलिए ?क्योंकि आप हर बात पर बोलते हैं इसपर क्यों चुप हैं,गांधी को नाथूराम गोडसे ने मार दिया उसके पीछे कितनी बड़ी कुर्बानी थी ,वह तब नहीं समझी गई अब जाकर लोगों के समझ अई है ,लिहाज़ा इस जोशीले नवजवान को भी आप आज नहीं तो कल समझ पाएंगे, मगर शायद आपको अब उतना लंबा इंतजार नहीं करना होगा क्योंकि हमारे समय में हमारे पास वॉट्सएप यूनिवर्सिटी मौजूद है आखिर सूचना क्रांति का यह फायदा जरूर है।

पुलिस के हाथ बांधे हुए फोटो आपने देखे होंगे आखिर बेचारी पुलिस आज गांधी जी को श्रद्धांजलि दे रही थी तो अहिंसा का पाठ कर रही थी ,लेकिन जहां गांधी हो वहां गोडसे का न होना भी कितना ज़्यादा गलत होगा इसलिए तो रामभक्त आया ,आतंकवादी हर किसी को नहीं कहा जा सकता जैसे देवेन्द्र को नहीं कहा जा सकता भले सबूत पूरे हों मगर वह उस पहचान को पूरा नहीं करता लिहाज़ा उसे हरगिज़ आतंकी मत कहिए आतंकी सिर्फ एक पहचान वाले होते हैं।
यह देश है राम का हां उसी राम का जो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं वहीं राम जिसे इक़बाल इमामे हिन्द कहते हैं वहीं राम जिसे गांधी ने मरते समय याद किया और जो उनके आखरी शब्दों में उजागर हुए हे राम।

अब ज़रा खुद को राम का भक्त कहने वाले रामभक्त को देखिए वह पुलिस के सामने गोली चलाता है,सबको पुलिस के सामने ललकारता है लेकिन पुलिस तो कम से कम गांधी वादी बनी हुई थी आज लिहाज़ा सब समझकर खामोश भी हो सकते हैं या फिर नींद से आप सड़कों पर हो रहे धमाकों की आवाज़ से जाग भी सकते हैं ,रही बात आतंकवादी होने की तो वह सिर्फ एक ख़ास पहचान वाले होते हैं ऐसा सुना जाता है।30 जनवरी 1947 से 30 जनवरी 2020 तक यह भी एक यात्रा है जो हमने तय की है तब गांधी को मारा था अब गांधी के विचार को मार देने का प्रयास है ।