अकरम शेख (लखनऊ)
22/जनवरी [बाराबंकी, यूपी]

जिस तरह से उत्तर प्रदेश की राजनीति अभी से तेवर बदल रही है और सियासी गर्मी का पारा रोज़ बढ़ता जा रहा है ऐसे में सपा, कांग्रेस और बीजेपी की त्रिकोणीय लड़ाई साफ़ होती जा रही है जिस में बड़ी भूमिका सपा और बीजेपी को ही निभानी है। जिस तरह से CAA को लेकर सपा भी अपना पक्ष साफ़ रखती नज़र आ रही है। लखनऊ में घंटा घर के सामने हो रहे महिलाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन में अपनी बेटी को भेज कर सन्देश और पक्ष को और साफ़ कर दिया है कि प्रदेश में सपा बीजेपी के आर पार का मोर्चा लेने को तैयार है।

ऐसे में उम्मीदवारों का चुनाव काफ़ी जटिल और चुनौती पूर्ण हो जाता है जिस तरह से दिल्ली में आम आदमी पार्टी की तरफ से 15 मौजूदा विधायकों का टिकट कट जाने की वजह से ज़्यादा तर लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है इस तरह का मामला किसी भी पार्टी के साथ किसी भी जगह हो सकता है।

हालाँकि आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं के मुताबिक पार्टी ने पहले सर्वे कराया था और जिन उम्मीदवारों के विरुद्ध जनता ने विरोध जताया था उन का टिकट काट दिया गया।

सपा की सक्रिय राजनीति में गौतम रावत भले ही नया नाम हो लेकिन जिस तरह से बाराबंकी के जैदपुर सीट को बीजेपी से छीन कर सपा के हवाले किया है इस से उन का क़द बढ़ जाता है। इस के अलावा सपा के शीर्ष नेतृत्व में भी गौतम रावत का सम्मान बढ़ता नज़र आ रहा है।

मौजूदा समाजवादी पार्टी मैदान में युवाओं पर ज़्यादा भरोसा करती हुई नज़र आ रही है क्यूंकि अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री और उस के बाद सपा अध्यक्ष के रूप में लाने पर ज़ोर पार्टी के युवाओं का ही था।

हालाँकि कि ख़ुद गौतम रावत आम जन में ख़ुद को नया नेता के रूप में पहचाने जाने का कोई कारण नहीं छोड़ रहे हैं। अभी से वह मेहनत में जुट गए हैं ताकि चुनाव के वक़्त गौतम रावत कोई नया नाम नहीं बल्कि एक जाना पहचाना चेहरा रहे।
देखने वाली बात यह होगी कि इस बदलती राजनीति में गौतम रावत नित नई चुनौतियों से निपटने के लिए ख़ुद को कितना सक्षम कर पाते हैं।