रोजाना किसी ना किसी विवाद के चलते देश में हिंसा का माहौल बना रहता है. वहीं इस बार देश के अरुणाचल प्रदेश में हिंसा और विरोध जारी है. दरअसल राज्य में 6 समुदायों को स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र (PRC) दिए. जिसके बाद राज्य सरकार पर स्थानीय लोग आगबबूला हैं और विरोध की वजह से हिंसा का माहौल बना हुआ है. जिसमें दो लोगों की मौत हो चुकी है. साथ ही राजधानी ईटानगर में आक्रोश में आए लोगों ने उपमुख्यमंत्री चोवना मेन के घर में आग लगा दी और डिप्टी कमिश्नर का दफतर भी तोड़ दिया.

अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी क्रोध है कि इस प्रस्ताव से वहां के स्थानीय निवासियों के अधिकार पर असर पड़ेगा क्योंकि स्थायी निवास प्रमाण-पत्र जिन समुदायों को जारी किया गया है वो गैर-अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजातियां (APST) हैं. वहीं शनिवार, 23 फरवरी को यहां अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू किया गया. जिसके बाद कई लोग विरोध करते हुए रविवार,24 फरवरी को सड़कों पर उतर आए.

क्या होता है स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र (PRC)?
स्थायी निवास प्रमाण-पत्र (PRC) उन भारतीय नागरिकों को दिया जाता है जो देश में रहने का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं. ये एक कानूनी दस्तावेज माना जाता है. इसके जरिए कई सरकारी सुविधाए को लेने के साथ-साथ अन्य दूसरे जरूरी काम में भी इसका प्रयोग किया जाता है.

अब तक क्या किया राज्य सरकार ने ?
अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार ने 6 गैर-अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजाति (APST) के समुदायों को PRC देने का ऑफर रखा था. जिस दौरान एक जॉइंट हाई पावर कमेटी (JHPC) ने कई लोगों से बात करके 6 समुदायों को PRC देने का ऑफर रखा, लेकिन उन लोगों के लिए जो अरुणाचल के स्थायी निवासी नहीं हैं और वो नामसाई और चांगलांग के जिलों में कई दशक से रह रहे हैं.

कौन से हैं ये 6 समुदाय?
ये 6 सनुदायों के लोग नामसाई और चांगलांग जिलों में रहते हैं. जिनमें सोनोवाल कछारी, मिशिंग, मोरान, देवरिस और आदिवासी शामिल हैं. साथ ही इस प्रस्ताव में विजयनगर में रहने वाले गोरखा भी शामिल हैं. बता दें कि इन 6 समुदायों में ज्यादातर समुदाय पड़ोसी राज्य असम में अनुसूचित जनजाति के रूप में दर्ज हैं.

आपको जाकारी के लिए बता दें कि फिलहाल अरुणाचल प्रदेश में JPHC की अनुशंसाओं को शनिवार, 23 फरवरी को विधानसभा में रखा जाना था लेकिन स्थानिय लोगों के विरोध के चलते इसे टेबर पर नहीं रखा जा सका.वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने मौजूदा हालात को मद्देनजर देखते हुए सदन को अगले सत्र तक के लिए स्थगित कर दिया.

(हसन हैदर)