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लखनऊ, 19 फरवरी 2020, (आरएनआई )। अभी हाल में ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिशाषी अभियन्ता कार्यालय, मुंशीपुलिया व अरविन्दो चौकी के महज चन्द कदम दूर सेक्टर-10, इंदिरा नगर में क्षेत्रीय भाजपा उपाध्यक्ष सरोज कुमारी द्वारा खुलेआम विद्युत चोरी कर विभाग को प्रतिमाह लाखों का चूना लगाने से उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन व भाजपा पार्टी में हड़कम्प मच गया था, क्योंकि उपरोक्त मामला कोई आम नहीं है, बिजली चोरी का मामला कहीं न कहीं सत्तापक्ष से जुड़ा था।

हमारे देश की सरकार जहां एक तरफ एक देश-एक कानून की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ एक शहर-एक विभाग में ही एक कानून/नियम लागू नहीं कर पाते हैं, जी हां, यह सच है……. यह है भाजपा सरकार का काला सच I

जहां एक तरफ पूर्व पार्षद एवं वर्तमान क्षेत्रीय भाजपा उपाध्यक्ष सरोज कुमारी द्वारा घरेलु संयोजन में लगे विद्युत् मीटर के पहले ही केबिल को बाईपास कर सब-मीटर के माध्यम से दुकानों में सप्लाई देने का खुलासा होने पर विभाग के अपने पुराने दो एसेसमेंट खारिज करते हुए रूपया 6,21,444.00 एसेसमेंट बनाया, उपरोक्त एसेसमेंट 8.5 किलोवाट व्यवसायिक पर बनाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ एक आम इंसान द्वारा मकान बनाने की चाहत में मीटर के पहले ही केबिल बाईपास कर मकान के निर्माण के लिए बिजली चोरी के आरोप में रूपया 8,82,314.00 एसेसमेंट बनाया गया, उपरोक्त एसेसमेंट 4.9 किलोवाट घरेलु पर बनाया गया।

कुल मिला कर सत्तारूढ़ पार्टी पदाधिकारी के यहाँ घरेलु 2 किलोवाट के विद्युत् कनेक्शन पर मीटर के पहले ही केबिल को बाईपास कर 8.5 किलोवाट व्यवसायिक लोड पर बना एसेसमेंट रूपया 6,21,444.00 और एक आम इंसान के यहाँ घरेलु 2 किलोवाट के विद्युत् कनेक्शन पर मीटर के पहले ही केबिल को बाईपास कर मकान निर्माण पर 4.9 किलोवाट लोड पर बना एसेसमेंट रूपया 8,82,314.00 आखिर क्यों ?

उपरोक्त मामले में क्षेत्रीय भाजपा उपाध्यक्ष सरोज कुमारी से रूपया 50,000.00 मात्र लेकर संयोजन जोड़ दिया जाता है, जबकि वहीं दूसरे उपभोक्ता एक आम नागरिक होने के कारण धारा 135 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है।

जब उत्तर प्रदेश की राजधानी में इस प्रकार चोरी के खेल व भेदभाव का मामला प्रकाश में आता है, तो अन्य जिलों का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं?