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नई द‍िल्‍ली, 27 जनवरी 2020, (आरएनआई )। जगनमोहन रेड्डी सरकार ने आंध्र प्रदेश विधान परिषद को खत्म करने का फैसला किया है। जगन सरकार ने विधान परिषद को खत्म करने वाले प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने विधान परिषद खत्म करने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। आज सुबह कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया। कैबिनेट की बैठक के बाद विधानसभा सत्र शुरू हुआ, जिसमें विपक्ष की ओर से हंगामा किया जा रहा है।

सीएम जगन मोहन रेड्डी की अगुआई वाली वाईएसआर कांग्रेस सरकार ने विधान परिषद में तीन राजधानियों वाला फॉर्म्युला अटकने के बाद यह फैसला लिया है। वाईएसआर कांग्रेस का आरोप है कि तीन राजधानी वाले प्रस्ताव को रोकने के लिए विपक्षी दल टीडीपी विधान परिषद में अपने बहुमत का गलत इस्तेमाल कर रही है, जबकि विधानसभा में इस पर मुहर लग चुकी थी। वहीं टीडीपी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जगन सरकार के कदम से साबित होता है कि यहां कोई संवैधानिक आदर्श नहीं है।

इससे पहले रविवार को पूर्व मुख्‍यमंत्री और नेता विपक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने अपने विधायकों के साथ बैठक की और तय किया कि टीडीपी के 21 विधायक विशेष सत्र का बहिष्कार करेंगे। आंध्र प्रदेश की विधान परिषद में कुल 58 सदस्‍य हैं और यहां चंद्रबाबू नायडू की पार्टी को बहुमत हासिल है। यहां पर टीडीपी के 27 विधायक हैं और YSRCP के 9 विधायक हैं। जगन मोहन की इच्‍छा के अनुसार, आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियों को लेकर एक विधेयक विधान परिषद में लाया गया जिसे विधान परिषद ने सेलेक्ट कमिटी के पास भेज दिया। इसके बाद जगन मोहन की परियोजनाएं आधी रह गई। YSRCP ने विधान परिषद को भंग करने मामले पर कहा कि यह होकर रहेगा और इसपर पार्टी की सर्वसम्‍मति है।

आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियों वाले बिल को लेकर सीएम जगनमोहन रेड्डी और विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू के बीच खींचतान चल रही है। इस प्रस्ताव के तहत आंध्र प्रदेश के लिए तीन राजधानी कार्यकारी राजधानी विशाखापट्टनम, विधायी राजधानी अमरावती और न्यायिक राजधानी कुर्नूल होगी। यह बिल विधानसभा में पास हो चुका है लेकिन विधान परिषद में अटक गया है।