लखनऊ ! समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सुशासन का ढोंग करने वालों का सच सामने आता जा रहा है। कानूनव्यवस्था के हालात बद से बदतर हैं। मुख्यमंत्री जी के दावे के विपरीत न तो अपराधी प्रदेश छोड़कर बाहर जा रहे हैं और नहीं वे जेल में कड़ी निगरानी में रह रहे हैं। जेल में भी माफियाओं के दरबार लग रहे हैं। जेलों के अन्दर बंदियों की हत्या, उनपर हमले तथा माफिया किस्म के अपराधियों द्वारा वहां से भी वसूली और हत्या की वारदातों का संचालन होने के समाचार हैं।

प्रदेश में कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब हत्या, लूट, अपहरण और दुष्कर्म किए जाने की घटनाएं न घटती हों। ऐसा लगता है प्रदेश में कानून का राज समाप्त है। बाबा  मुख्यमंत्री के बड़बोलेपन से अपराधियों में कतई खौफ नहीं है। बल्कि सही स्थिति तो यह है कि पुलिस को ही अपराधियों का ज्यादा खौफ रहता है। कई जगहों पर दबंगों अपराधियों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया। पुलिस ने एनकाउण्टरों के नाम पर जो फर्जी कार्रवाइयां की उनकी कलई जांच पड़ताल में खुल गई।

ग्रेटर नोएडा में एनटीपीसी-दादरी रोड पर समाजवादी पार्टी के नेता एवं सांसद सुरेन्द्र नागर की कम्पनी के 65 लाख रूपए लूट लिए गए। नजीवाबाद में बसपा नेता एहसान अहमद की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। बुलंदशहर में 5 लाख की फिरौती के लिए तीन मासूम बच्चों की हत्या कर दी गई। राजधानी लखनऊ में ही सर्राफा व्यापारियों से लूट और उनकी हत्या की कई घटनाओं का खुलासा भी नहीं हो सका। दुष्कर्म की घटनाएं भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

प्रशासन की निष्क्रियता और भाजपा नेतृत्व में इच्छाशक्ति की कमी के कारण बढ़ते अपराधों से राज्य सरकार के प्रति जनता में असंतोष बढ़ता ही जा रहा है। जनता भाजपा से भयभीत एवं सहमी हुई है। सरकारों की जिम्मेदारी जनता के जान-माल की सुरक्षा की गारन्टी होती है! पर भाजपा सरकार इससे बेखबर है। यह लोकतंत्र में खतरनाक स्थिति है।