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वैसे तो मीडिया का काम है खबरें बताना और उनको बाहर लाना पर मीडिया के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिन्ह लगने लगा है। जिसका कारण मीडिया खुद है। तमाम ऐसी ख़बरें जो सामने आनी चाहिए वो नहीं आ पाती। चैनल इसलिए उनको कवर नहीं करते क्योंकि कुछ को वो टीआरपी नहीं दिला पाती तो कुछ की स्वामीभक्ति पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।

ऐसी ही एक खबर है असम की।हिन्दुस्तान पेपर कारपोरेशन लिमिटेड के स्थायी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है। 2015 से उनका प्रोविडेंट फंड भी जमा नहीं हुआ है। बिना वेतन के 28 महीने से कोई कैसे जी सकता है, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।  29 अप्रैल को भारत सरकार को ज़िम्मदार बताकर एक कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली । 55 लोगों ने आत्महत्या कर ली है। इतनी बात बताने के लिए असम से चल कर दिल्ली आए हैं। दि प्रिंट वेबसाइट पर रेम्या नायर की रिपोर्ट के मुताबिक, ओएनजीसी का कैश रिज़र्व 9,511 करोड़ से घट कर 167 करोड़ पर आ गया है। मोदी सरकार अपने वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए ओ एन जी सी के ख़जाने का इस्तेमाल करती है। ओएनजीसी को अपना ख़र्चा चलाने के लिए कम से कम 5000 करोड़ की पूंजी चाहिए। सरकार को विनिवेश का लक्ष्य पूरा करना था। उसने ओएनजीसी पर दबाव डाला कि HPCL ख़रीदे। 36,915 की खरीद के लिए कंपनी ने 20,000 करोड़ का कर्ज़ किया। कोरपोरेशन के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ।

पिछले 16 महीनों में भारत का आटोमोबिल सेक्टर शेयर बाज़ार में करीब 42 अरब डॉलर गंवा चुका है। आटोमोबिल सेक्टर में मंदी आ रही है। बैंकों में कैश नहीं है। उपभोक्ता के पास कार खरीदने के पैसे नहीं है। कार निर्माताओं की कारें बिक नहीं रही हैं। मारुति और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों के दाम में गिरावट आई है। इनकी कारों की बिक्री घटती जा रही है। किसी भी चैनल को धर्म, जाति , हिंदू मुस्लिम बहस कराने से फुर्सत नहीं क्योंकि माहौल राजनीतिक था और TRP भुनाने का बेहतरीन मौका भी।