कोलकाता। महानगर कोलकाता में बैठकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेश में निर्यात पर कर छूट का लाभ लेने वाले छह लोगों को केंद्रीय खुफिया राजस्व ब्यूरो (डीआरआई) की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। इनके नाम सुजीत स्वर्णकार, सजल स्वर्णकार, दीपांकर पाल, शुभंकर पाल, अर्जुन अधिकारी और प्रसेनजीत दास है। शनिवार को डीआरआई के पूर्व क्षेत्रीय उप निदेशक पार्थ प्रतिम घोष ने बताया कि विशिष्ट इनपुट के आधार पर डीआरआई ने एक बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा किया है। कोलकाता के लोगों के एक समूह ने एक विशेष सिंडिकेट के जरिए जाली खरीद आदेश, जाली निर्यात चालान और खरीद के कागजात जैसे झूठे निर्यात दस्तावेज तैयार किए थे और उन्हें शिपिंग दाखिल करने के लिए इस्तेमाल किया था।

अनुचित निर्यात लाभ अर्जित करने के लिए पेट्रापोल लैंड कस्टम्स स्टेशन में शिपिंग बिल को पास कराया था। शिपिंग बिलों को वास्तविक वस्तुओं को प्रस्तुत किए बिना केवल कागज पर निर्यात के लिए संसाधित किया गया था। माल ढोने वाले वाहन भी मौजूद नहीं थे। जांच से पता चलता है कि सिंडिकेट ने शिपिंग दस्तावेजों पर झूठे वाहन नंबर प्रदान किए थे और निर्यात दस्तावेजों पर बांग्लादेश सीमा शुल्क के झूठे तरीके से मुहर लगाने और हस्ताक्षर दिखाया था।

उन्होंने बताया कि ऐसे 10 निर्यात फर्मों के आयात निर्यात कोड का उपयोग धोखाधड़ी वाले 51 शिपिंग बिलों को तैयार करने में किया गया है, जिसमें पान मसाला, दोपहिया और तिपहिया वाहनों के पार्ट्स आदि का 24 करोड़ रुपये का निर्यात दिखाया था। उसकी वजह से करीब 12 करोड़ रुपये की जीएसटी में छूट मिली थी। चूंकि बांग्लादेश भारत के लिए स्पेशल इकोनामिक जोन में शामिल है, इसलिए इस छूट का लाभ मिलता है। इस तरह का कोई भी निर्यात वास्तविक तौर पर नहीं किया गया था।इससे पहले डीआरआई ने दिसंबर 2018 में इस सिंडिकेट के तीन मास्टरमाइंडों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने वास्तव में धोखाधड़ी की योजना बनाई थी।

सीमा शुल्क ब्रोकर, जिसने अपने टिकटों को धोखाधड़ी में उपयोग करने की अनुमति दी है, को भी जनवरी में गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों से लगातार पूछताछ के बाद शुक्रवार की शाम उत्तर 24 परगना के बनगांव से इन सभी छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस तरह अब तक इस मामले में कुल 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इन सिंडिकेट सदस्यों के अलावा, पांच कस्टम अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उनसे भी पूछताछ की जा रही है। पुख्ता तथ्यों के आधार पर उन्हें विभाग द्वारा निलंबित कर दिया गया है।