228 Views

कोटा, 04 जनवरी 2020, (आरएनआई )। राजस्थान के कोटा के जेके लोन सरकारी अस्पताल में मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। अब तक 107 मासूम दम तोड़ चुके हैं। कोटा के बाद बूंदी में भी यह संक्रमण फैल गया है। जहां 10 मासूम जिंदगी की जंग हार चुके हैं। इसी बीच कोटा मामले में गठित जांच समिति ने दो दिन पहले अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

समिति का कहना है कि अस्पताल में लगभग हर तरह के उपकरण और व्यवस्था में बहुत सारी खामियां हैं। बच्चो की मौत का मुख्य कारण हाइपोथर्मिया बताया गया है। हालांकि सच्चाई यह है कि इससे बच्चों को बचाने के लिए आवश्यक अस्पताल का हर उपकरण खराब है। कोटा के अस्पताल में बीचे 34 दिन में 107 बच्चे काल के गाल में समा चुके हैं।

केंद्रीय अधिकारियों का दल कोटा के जेकेलोन अस्पताल में जांच के लिए पहुंचा है। इसमें जोधपुर एम्स के बाल चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह, मंत्रालय के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक डॉ. दीपक सक्सेना, एम्स जोधपुर के निओनेटोलॉजिस्ट डॉ. अरुण सिंह और एनएचएसआरसी सलाहकार डॉ. हिमांशु भूषण शामिल हैं।

विशेषज्ञों का दल राज्य सरकार के साथ मिलकर कोटा मेडिकल कॉलेज में मातृ, नवजात शिशु और बाल चिकित्सा देखभाल सेवाओं की समीक्षा करेगा। साथ ही कमियों के विश्लेषण के आधार पर संयुक्त कार्य योजना भी बनाएगा। ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य चिकित्सा शिक्षा विभाग के जरिए कोटा मेडिकल कॉलेज को वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मदद की पेशकश की है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, मैं जेके लोन अस्पताल में काल के गाल में समाने वाले कुछ शिशुओं के परिवार से मिला। दुख की इस घड़ी में हम इन परिवारों के साथ खड़े हैं। मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री को दो बार लिख चुका हूं। जिसमें चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सुझाव हैं।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा शुक्रवार को जिले के प्रभारी मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और विधायक दानिश अबरार के साथ अस्पताल पहुंचे। लेकिन मंत्री के दौरे से पहले और बाद में एक बच्चे ने दम तोड़ दिया। वहीं मंत्री के स्वागत के लिए अश्पताल प्रशासन द्वारा बिछाए गए ग्रीन कारपेट ने विवाद खड़ा कर दिया है। मंत्री की आवभगत में अश्पताल प्रशासन इतनी व्यस्त रहा है कि वह उस बच्ची को भी नहीं बचा सका जिससे मंत्री आईसीयू में मिले थे।